जेन जी और जेन अल्फा ईमानदार पीढिय़ां
पैलेट गन का कारण जानना जरूरी
शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत
मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघके प्रमुख मोहन भागवत ने युवा पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए कहा कि जेनरेशन जी और जेनरेशन अल्फा ईमानदार पीढिय़ां हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नीट परीक्षा के पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर पेलेट गन के इस्तेमाल के कारणों का अध्ययन किया जाना चाहिए. भागवत ने कहा “लाठी हमला क्यों हुआ? पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, और हमें इसके पीछे का कारण जानना होगा.”उन्होंने कहा कि जेन जी और अल्फा “ईमानदार पीढिय़ां” हैं.
भागवत ने कहा “मैं यह नहीं कह रहा कि जेन जी को विरोध नहीं करना चाहिए. लेकिन लोकतंत्र में काम करने के तरीके और नियम होते हैं. डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने हमें जो संविधान दिया है, अगर हम उनके दो भाषण भी पढ़ें, तो हमें पता चल जाएगा कि मुद्दों को कैसे सुलझाया जाना चाहिए.”मैं यह साफ करना चाहता हूं कि अगर ‘जेन जी’ किसी आंदोलन में शामिल होती है, तो वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं. वे हमारे अपने लोग हैं. वे हमारी अगली पीढ़ी हैं. बातचीत के लिए अपनापन और आपसी सम्मान की जरूरत होती है. हमें एक-दूसरे को समझने और सम्मान देने की जरूरत है. तभी सार्थक बातचीत हो सकती है, जिसमें हम उनकी चिंताओं को समझें और वे हमारे नजरिए को समझें. ऐसा ही होना चाहिए. जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ मौजूदा पीढ़ी से अधिक ईमानदार है. भागवत ने कहा “आजकल टेक्नोलॉजी ऐसी है कि नकली वीडियो बनाए जा सकते हैं और आपके या मेरे नाम से झूठे बयान फैलाए जा सकते हैं. इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय किसी भी कंटेंट पर तब तक भरोसा न करें जब तक कि उसे किसी भरोसेमंद स्रोत से वेरिफाई न कर लिया जाए.
जब तक भेदभाव रहेगा तब तक आरक्षण भी जारी रहेगा
मोहन भागवत ने कहा कि आरक्षण सामाजिक भेदभाव को दूर करने के लिए दिया गया है और जब तक समाज में भेदभाव रहेगा, तब तक इसकी आवश्यकता बनी रहेगी। डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का ईमानदारी से पालन किया जाए तो इस विषय पर कोई समस्या नहीं होगी। भागवत ने कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है और उनका उत्थान हो गया है, उन्हें इसका लाभ जरूरतमंद अन्य लोगों तक पहुंचाने की सोच रखनी चाहिए।
वास्तविक नेता वह है जो पीछे रहकर काम करता
भागवत ने आगे कहा कि सच्चा नेतृत्व केवल भाषण देने, चुनाव जीतने या लोगों को उपदेश देने तक सीमित नहीं होता। उन्होंने कहा कि वास्तविक नेता वह होता है जो पीछे रहकर काम करता है, दूसरों को आगे बढ़ाता है और सफलता तथा सम्मान सभी के साथ साझा करता है। नेतृत्व का उद्देश्य केवल लोगों का नेतृत्व करना नहीं, बल्कि नए नेताओं को तैयार करना होना चाहिए। उनके अनुसार नेतृत्व का मतलब लोगों को सही दिशा और प्रकाश की ओर ले जाना है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति केवल सामने आकर भाषण देता है या चुनाव जीतता है, वही नेता हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
सच्चे नेता को दूसरों के गुणों की सराहना करनी चाहिए
भागवत ने कहा कि सच्चे नेता के पास ज्ञान होना चाहिए और उसे दूसरों के गुणों की सराहना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक अच्छा नेता सफलता, सम्मान और उपलब्धियों का श्रेय अकेले नहीं लेता, बल्कि उसे सभी के साथ बांटता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब संघर्ष का समय आए तो नेता को योद्धा की तरह दृढ़ता से खड़ा होना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि नेतृत्व का उद्देश्य खुद हमेशा आगे रहना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों को तैयार करना है जो भविष्य में समाज का नेतृत्व कर सकें। यदि किसी व्यक्ति का नेतृत्व दूसरों को नेतृत्व करने योग्य बना देता है, तभी वह वास्तविक नेतृत्व कहलाता है।
चीन और पाकिस्तान हमारे दुश्मन नहीं
भागवत ने कहा भारतीय समाधान दूसरों को जीतना या मिटाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा तालमेल बिठाने वाला और सबको साथ लेकर चलने वाला तरीका अपनाना है, जिसके लिए बातचीत की जरूरत होती है. कभी-कभी, टकराव खत्म होने के बाद हमें वहीं से आगे बढऩा होता है जहां हमने छोड़ा था. इसलिए, हमेशा की नफरत और दुश्मनी कोई समाधान नहीं है. जब कोई समस्या आती है, तो हमें उसे संभालना होता है और उसे संभालने का एक तरीका भी होता है. हमें उस तरीके को अपनाना चाहिए. ऐसा नहीं है कि पाकिस्तानी दिल से भारतीयों के दुश्मन हैं, या भारतीय ऐसे हैं. टकराव के समय हम अपनी सरकार और अपनी सेना के साथ खड़े होते हैं.
जेन जी पर हमें भरोसा, राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं : भागवत