नई दिल्ली: भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने देश में मुफ़्त सरकारी सुविधाएं देने की बढ़ती आदत पर बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं और बिजली-पानी जैसे बुनियादी ढांचे को उसकी असली लागत से कम दाम पर या मुफ़्त में देना देश के भविष्य के विकास के लिए बहुत नुकसानदेह है.
नागेश्वरन ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही “सार्वजनिक नीति में ‘मुफ़्त’ सबसे महंगा शब्द है.” उनका कहना है कि बुनियादी ढांचे को मुफ़्त या सस्ता करने का वादा करना एक विरोधाभास है. इसका सीधा नुकसान देश की अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ता है. मुख्य आर्थिक सलाहकार ने समझाया कि जब भी कोई सरकारी सेवा उसकी असली लागत से कम दाम पर दी जाती है, तो अंत में उसका हर्जाना तीन तरीकों से सामने आता है जब पानी या बिजली जैसी जरूरी चीजें बिल्कुल मुफ़्त मिलती हैं, तो लोग उनकी कद्र नहीं करते. वे इसे असीमित समझकर पानी और बिजली बर्बाद करने लगते हैं. सरकार को इस घाटे को पूरा करने के लिए ईमानदार टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल भारी सब्सिडी देने में करना पड़ता है. रखरखाव के लिए पैसा न होने के कारण सरकारी इमारतें, सडक़ें, और पाइपलाइनें धीरे-धीरे सडऩे और टूटने लगती हैं. अक्सर नेता और सरकारें यह तर्क देती हैं कि मुफ़्त सुविधाएं गरीबों की मदद के लिए हैं. लेकिन नागेश्वरन ने इस बात को गलत साबित किया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पानी को मुफ़्त करने से उन अमीर और संपन्न परिवारों को फायदा होता है जिनके घरों में पहले से सरकारी पाइपलाइन का कनेक्शन है. इसके उलट, समाज का सबसे गरीब और कमजोर वर्ग आज भी इन सरकारी नेटवर्क से दूर है. उनके घरों तक सरकारी पानी नहीं पहुंचता. इस वजह से इन गरीब लोगों को प्राइवेट टैंकरों से बहुत महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ता है. इस तरह, मुफ़्त की नीति असल जरूरतमंदों की मदद करने में पूरी तरह नाकाम रहती है.
सही कीमत और सीधा सपोर्ट है समाधान
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, देश के विकास के लिए सेवाओं की ‘सही और ईमानदार कीमत’ वसूलना बेहद जरूरी है. जब बिजली-पानी का सही बिल वसूला जाएगा, तभी विभागों के पास इतना पैसा आएगा कि वे नई लाइनें बिछा सकें और गरीबों तक सुविधाएं पहुंचा सकें. यदि सरकार गरीबों की मदद करना ही चाहती है, तो मुफ़्त सुविधाएं बांटने के बजाय उन्हें सीधे टारगेटेड सपोर्ट जैसे सीधे उनके बैंक खाते में नकद मदद दे सकती है. उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत की जीडीपी ग्रोथ भले ही 7.7 प्रतिशत की मजबूत दर पर हो, लेकिन केवल सरकारी खर्च के भरोसे हमेशा के लिए आर्थिक विकास नहीं टिका रह सकता. देश में प्राइवेट कंपनियों का निवेश बढ़ाने के लिए सही मूल्य नीति अपनाना बहुत जरूरी है.
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने दी बड़ी चेतावनी, फ्री सरकारी सुविधाओं से गरीबों का नुकसान