नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक अब केवल प्रशासनिक सुविधा का साधन नहीं रही, बल्कि एक संवैधानिक साधन बन गई है जो कानून के समक्ष समानता को मजबूत करती है, न्याय तक पहुंच को बढ़ाती है और न्यायपालिका को प्रक्रियात्मक जटिलताओं से ऊपर उठने में मदद करती है. सीजेआई ‘न्यायिक प्रक्रिया के पुनर्गठन और डिजिटल परिवर्तन’ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे.
सीजेआई ने कहा “हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर अदालत एक ‘एकीकृत डिजिटल कोर्ट’ के रूप में काम करे. ये अदालतें न केवल हाइब्रिड सुनवाई की सुविधाओं से लैस हों, बल्कि पूरी तरह से कागज रहित होकर काम करने में भी सक्षम हों. तकनीक अब एक संवैधानिक साधन बन चुकी है.” उन्होंने कहा ‘अब यह केवल प्रशासनिक सुविधा की बात नहीं है; बल्कि यह एक ऐसा साधन है जो कानून के समक्ष समानता को मजबूत करती है, न्याय तक पहुंच बढ़ाती है और न्यायपालिका को प्रक्रिया की जटिलताओं से ऊपर उठने में मदद करती है.”सीजेआई ने कहा “उसी सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए हमारा व्यापक दृष्टिकोण एक ऐसे ‘नेटिवली डिजिटल’ पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जहां न्याय कोई ऐसी जगह न हो जहां किसी को जाना पड़े, बल्कि एक ऐसी सेवा हो जो सुगम, पारदर्शी और हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध हो.” सीजेआई ने कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अब यह केवल भविष्य का एक सपना नहीं रह गया है, बल्कि इस पर काम शुरू हो चुका है. उन्होंने कहा कि ई-कमेटी सक्रिय रूप से एक ऐसा ‘डिजिटल आधार’ तैयार कर रही है, जिससे तकनीक किसी भी मामले की शुरुआत से लेकर अंत तक मदद कर सके और न्याय प्रणाली से जुड़े हर व्यक्ति को एक साथ जोड़ सके. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी न्याय प्रणाली के मूल में एक सीधा लेकिन स्थायी वादा होता है हर व्यक्ति, चाहे उसकी परिस्थिति या साधन कुछ भी हों, उसे निष्पक्ष, समय पर और प्रभावी ढंग से न्याय मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली में सुधार का आकलन इस बात से होता है कि नागरिकों, वकीलों और अन्य संबंधित पक्षों को इससे कितना सार्थक लाभ मिलता है.
टेक्नोलॉजी अब संवैधानिक साधन बन गई है: सीजेआई