विधानसभा में हुई नव गठित सभा समि?तियों की पहली बैठक
विधानसभा का ही लघु स्वरूप है विधानसभा समितियां : विधानसभा अध्यक्ष
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश का लोकतंत्र सशक्त हो रहा हैं। हमारा लोकतंत्र निरंतर परिपक्व हो रहा है। लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा अभिव्यक्ति के प्रमुख मंच हैं। विपक्ष की सकारात्मक आलोचना का भी इन सदनों के सत्रों में स्वागत किया जाता है। कई बार सदस्यों की अभिव्यक्ति और दिए गए सुझावों से सही दिशा में कार्य करना संभव हो जाता है। मध्यप्रदेश सरकार, मध्यप्रदेश विधानसभा की विभिन्न समितियों के सुझावों पर कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए नवगठित सभा समितियों की संयुक्त बैठक को विधानसभा में संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने सभी नवगठित समितयों के सभापतियों और सदस्यों को मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य के साथ ही अन्य राज्यों में भी इन समितियों के भ्रमण होते हैं। विधानसभा का गत दिसम्बर माह में विशेष सत्र हुआ था, जो एक श्रेष्ठ परम्परा के रूप में हमारे सामने उदाहरण है। विभिन्न समितियां अपनी सक्रिय भूमिका से योजनाओं के आंकलन और विश्लेषण का दायित्व निभाएंगी। डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश विधानसभा के वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल स्वर्णिम होगा। डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र में बहनों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बनाने की पहल की है। पूरे देश में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। आने वाले समय में संसद में एक तिहाई स्थानों पर महिलाओं की भूमिका होगी। इसके लिए अप्रैल माह में ही संसद का विशेष सत्र हो रहा है। महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने की दिशा में जो पहल हुई है वह हमारे लोकतंत्र के परिपक्व और सशक्त होने का ही प्रमाण है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमें पूर्वजों के बलिदान के कारण स्वतंत्रता मिली है। लोकतांत्रिक व्यवस्था हमारे लिए गर्व का विषय है। लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना है। विधानसभा की भूमिका माँ की तरह होती है। सभी सदस्य ऐसा ही भाव रखकर कार्य कर रहे हैं। विधानसभा की समितियां विधानसभा का ही लघु स्वरूप हैं।
सिंहस्थ के लिए प्रस्तावित सभी कार्य वर्ष 2027 की दीपावली तक पूर्ण किए जाएं
मुख्यमंत्री ने कहा है कि सिंहस्थ:2028 के लिए प्रस्तावित सभी कार्य वर्ष 2027 की दीपावली तक आवश्यक रूप से पूर्ण कर लिए जाएं। सिंहस्थ के सफल संचालन, विकास कार्यों की निगरानी और समीक्षा तथा सूचना शिक्षा-संचार गतिविधियों के लिए आवश्यक अधिकारियों-कर्मचारियों की संबंधित विभागों से तत्काल पूर्ति की जाए। सिंहस्थ के सफल संचालन के लिए पर्याप्त अधिकारियों-कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। सिंहस्थ से संबंधित विभिन्न दायित्वों के लिए सघन प्रशिक्षण की व्यवस्था आरंभ की जाए। अधोसंरचना से संबंधित सभी कार्य गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण हो। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति की हुई 5वी बैठक में दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री मंडलीय समिति की आगामी बैठक उज्जैन में की जाए। डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए हो रहे कार्यों की गुणवत्ता और बेहतर वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कार्यों का थर्ड पार्टी ऑडिट आवश्यक रूप से कराया जाए। सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन के विभिन्न क्षेत्रों में बनने वाले भवनों का निर्माण इस प्रकार किया जाए जिससे वे सिंहस्थ 2028 के बाद होने वाले वार्षिक आयोजनों के लिए भी उपयोगी हों। इसी प्रकार सडक़ों का निर्माण इस प्रकार किया जाए जिससे महाकाल लोक के अतिरिक्त उज्जैन के अन्य प्रमुख तीर्थों तक आवागमन अधिक सुगम हो सके। डॉ. यादव ने कहा कि दूरदराज से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा की दृष्टि से उज्जैन के 100 कि.मी. रेडियस में होम-स्टे, पार्किंग, जन सुविधाएं विकसित करने को प्राथमिकता दी जाए। सिंहस्थ के समस्त प्रबंधन में स्थानीय संस्थाओं के सहयोग और जनसहभागिता को प्रोत्साहित किया जाए। डॉ. यादव ने क्षिप्रा नदी पर पैदल तीर्थ यात्रियों के लिए पृथक से ब्रिज बनाने के निर्देश भी दिए। डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्री मंडलीय समिति ने 139.14 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की।
सशक्त और परिपक्व हो रहा भारतीय लोकतंत्र : डॉ. यादव