गांधीनगर : भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने युवा वकीलों के लिए पेशेवर विशेषज्ञता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि वकील पेशे के हर पहलू में माहिर नहीं हो सकते, ठीक उसी तरह जैसे क्रिकेटरों से टी20 मैच में सभी भूमिकाएं निभाने की अपेक्षा नहीं की जाती है। सीजेआई ने कहा कि किताबें केवल समझ देती हैं, जबकि वास्तविक अभ्यास में अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यावहारिक बाधाओं के तहत काम करने की क्षमता की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि वकीलों का ज्यादातर काम अनदेखा और उपेक्षित रह जाता है।
मुख्य न्यायाधीश ने क्रिकेट के उदाहरण से इस बात को स्पष्ट किया और कहा कि सफल टीमें भूमिकाओं की स्पष्टता और व्यक्तिगत क्षमताओं के आधार पर बनती हैं। टी-20 मैच का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी सूर्यकुमार यादव से डेथ ओवरों में गेंदबाजी करने या जसप्रीत बुमराह से बल्लेबाजी में निर्णायक भूमिका निभाने की उम्मीद नहीं करता। उन्होंने कहा कि इसी तरह वकीलों को भी धीरे-धीरे उन क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जिनमें उनकी क्षमताएं हैं और उन्हीं क्षमताओं के आधार पर अपनी पहचान बनानी चाहिए। सीजेआई ने कहा इस पेशे में आपकी सही जगह कहां है यह सवाल शुरुआत में ही सुलझा लेना जरूरी है, क्योंकि यह हर काम में समान रूप से मेहनत करने वालों को शायद ही कभी पुरस्कृत करता है। आपमें से कुछ क्रिकेट प्रेमी होंगे और अगर आप सुनवाई के बीच टी20 विश्व कप देख रहे हैं तो आपने शायद यहां कुछ प्रासंगिक बात देखी होगी। सफल टीमें इस धारणा पर नहीं बनतीं कि हर खिलाड़ी को हर चीज में माहिर होना चाहिए। कोई भी सूर्यकुमार यादव से डेथ ओवरों में गेंदबाजी करने या बुमराह से लक्ष्य का पीछा करने की उम्मीद नहीं करता। उन पर भरोसा किया जाता है कि वे वही करेंगे जो वे सबसे अच्छा करते हैं और टीम इसी स्पष्टता के आधार पर बनती है। मेरा सुझाव है कि यही सिद्धांत आपके पेशे पर भी लागू होता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रतिष्ठित वकीलों ने हर चीज में एक समान प्रयास करके यह मुकाम हासिल नहीं किया। उन्होंने कहा “यह ऐसा सवाल नहीं है जिसका समाधान पहले साल में या यहां तक कि तीसरे साल में भी हो जाए। लेकिन इसे शुरुआत में ही पूछना और बार-बार इस पर विचार करना उचित है, क्योंकि जो वकील अपने आप में सबसे सहज प्रतीत होते हैं, वे लगभग बिना किसी अपवाद के वे होते हैं जिन्होंने किसी समय अपने काम को छोडक़र वकालत करना शुरू कर दिया होता है।”
वकील पेशे के हर पहलू में माहिर नहीं हो सकते : सीजेआई