विंध्य भारत, रीवा
ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओंकार नाथ खरे जन्म शताब्दी वर्ष बैनर तले सोमवार 23 जनवरी को दोपहर 12 बजे से स्थानीय स्वयंवर बारातघर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के अवसर पर समता सम्पर्क अभियान, नारी चेतना मंच, बिरसा मुंडा विचार मंच,विंध्यांचल जन आंदोलन एवं समाजवादी कार्यकर्ता समूह के संयुक्त तत्वावधान में नारी चेतना मंच की नेत्री मेहरुन्निशा की अध्यक्षता में संगोष्ठी सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ श्रद्धा सिंह ने किया। संगोष्ठी का विषय प्रवेश डॉ प्रकाश तिवारी ने कराया।
संगोष्ठी को प्रमुख रूप से संबोधित करते हुए समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस यदि जीवित होते देश का दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन टाला जा सकता था। विभाजन का विरोध करते हुए समय गांधी जी को सुभाष चंद्र बोस बहुत याद आए थे। सावरकर के द्वि-राष्ट्रवाद की बात से मोहम्मद अली जिन्ना बहुत मदद मिली। आखिरकार इन्होंने खलनायक की भूमिका निभाते हुए देश का बंटवारा करा दिया। श्री खरे ने कहा कि महात्मा गांधी को सबसे पहले सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रपिता कहा था। इस संबोधन को विवादित बनाने वाले लोग निश्चित रूप से सुभाष चंद्र बोस को अपमान कर रहे हैं। श्री खरे ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस दोनों देश को आजाद कराना चाहते थे लेकिन कुछ सवालों पर उनके बीच मतभेद थे , मन भेद नहीं। आजादी के आंदोलन का शंखनाद करने के बाद दोनों एक दूसरे का पूरक बन गए थे। महात्मा गांधी ने जब बम्बई में 8 अगस्त सन 1942 की रात्रि अंग्रेजों भारत छोड़ो और करो या मरो का नारा दिया तो सुभाष चन्द्र बोस ने भी 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हॉल के सामने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च कमांडर के रूप में दिल्ली चलो का नारा देकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ शंखनाद कर दिया था। संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता बिरसा मुंडा विचार मंच के संस्थापक समाजसेवी देवेंद्र सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि सुभाष चंद्र बोस महाभारत के कर्ण की तरह महान योद्धा थे। विषम परिस्थितियों में उन्होंने देश के बाहर जाकर आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करके भारत को ब्रिटिश गुलामी से मुक्त कराने का आवाह्न किया। सन 1940 में आगरा की चुंगी मैदान की एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देकर भारतीय जनमानस में स्वतंत्रता की भावना का उबाल ला दिया था। कार्यक्रम में समता सम्पर्क अभियान के शेषमणि शुक्ला , सुरेंद्र नाथ माझी, समाजसेवी बी पी नामदेव, बिरसा मुंडा विचार मंच के विष्णु कुशवाहा, पत्रकार अभिषेक कुशवाहा, समाजवादी कार्यकर्ता समूह के संतोष माझी, नारी चेतना मंच नेत्री इतवरिया चंदेल, गीता महंत, साक्षी महंत, विधि छात्रा दुर्गा साकेत आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।