विंध्यभारत, रीवा
कड़ाके की ठंड सिर्फ आम पब्लिक की ही हालत नहीं बिगाड़ रही। वन्जयीवों का भी दम निकाल रही है। लगातार वन्यजीवों की मौत हो रही है। मौत की वजह भी स्पष्ट नहीं हो पा रही। अभी तक जंगलों में ही विचरण करने वाले तेंदुओं की जानें जा रही थी। अब यह दहशत चिडिय़ाघर तक पहुंच गई है। चिडिय़ाघर में एक उम्रदराज मादा तेंदुआ की भी जान चली गई। हालांकि उसे किसी तरह की बीमारी नहीं थी। वह अपनी उम्र पूरी कर चुकी थी। उम्र के अंतिम पड़ाव में थी।
स्वाभाविक मौत हुई। मौत के बाद प्रोटोकॉल के अनुसार मादा तेंदुआ का पीएम कराया गया। इसके बाद अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान सीसीएफ रीवा, डीएफओ, एसडीओ व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इस संबंध में हमारे सूत्रों ने बताया है कि जिस मादा तेंदुआ की मृत्यु हुई। उसकी उम्र 19 से 20 साल आंकी गई। वैसे तो जंगल में विचरण करने वाले तेंदुओं की अधिकतम आयु 12 से 15 साल ही होती है लेकिन चिडिय़ाघर में जिस तेंदुआ की मौत हुई। उसकी उम्र करीब 19 से 20 साल आंकी गई है। अपनी सामान्य उम्र से कहीं अधिक जीवन चिडिय़ाघर में मादा तेंदुआ ने जिया। मृत्यु के बाद सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
उल्लेखनीय है कि इस समय रीवा और विंध्य के जंगलों में तेंदुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ठंड में इन्हीं तेंदुओं की मौत और शिकार भी हो रहा है। यह चिंता का विषय बन गया है। कुछ दिन पहले गोविंदगढ़ में तेंदुआ मृत मिला था। फिर चाकघाट के ढखरा में एक तेंदुआ मृत मिला। पंजे कटे हुए पाए गए। अब चिडिय़ाघर के तेंदुआ की भी मौत हो गई। मौत की वजह हालांकि अभी स्पष्ट नहीं हो पा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इन लगातार तेदुओं की हो रही मौतों का राज खुलेगा।