एबीजी जांच के लिए संजय गांधी अस्पताल में भटकते रह जाते हैं लोग, सुपर स्पेशलिटी में कई मशीने स्टोर में सालों से कैद

रीवा। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और संजय गांधी अस्पताल अव्यवस्थाओं की मकडज़ाल में फंसा हुआ है। यहां सिर्फ बिल्डिंग बन रही हैं लेकिन मरीजों को इलाज के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ही ज्यादा जोर है लेकिन सुविधाओं की तरफ सब ने आंखे मूंद ली है। अब ताजा मामला एबीजी जांच का ही देख लीजिए। संजय गांधी अस्पताल में विंध्य भर के गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। यहां हर दिन मरीजों की सांस उखड़ जाती है। इसके बाद भी इतने बड़े अस्पताल में सिर्फ एक एबीजी मशीन है। वहीं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल कहने को स्पेशलिटी अस्पताल है लेकिन यहां भी सिर्फ एक ही एबीजी मशीन है। एबीजी मशीन कहने में भले ही तीन अच्छ का छोटा नाम हो लेकिन यह किसी भी मरीज की उखड़ती सांसों को रोकने और जिंदा रखने में बड़ी अहम भूमिका निभाती है। यही जांच दोनों अस्पतालों में मुश्किल से होती है। इसी का टोटा लगा रहता है। हाल ही में कार्टेज खत्म होने पर इस मशीन और जांच के खेल का सच सामने आया।

सुपर का कार्टेज खत्म हो गया था

एसजीएमएच के मेडिसिन विभाग के एसपीडब्लू में एक मशीन लगी है। वहीं एक मशीन सुपर के सीटीवीएस में लगी है। दोनों ही जगह सीरियर मरीज भर्ती होते हैं। इन मरीजों की हर आधे घंटे में जांच जरूरी है। इसी मशीन का कार्टेज सुपर में कुछ दिन पहले खत्म हो गया था तो एसजीएमएच के मेडिसिन विभाग का कार्टेज लगा दिया गया। इससे सुपर के मरीजों की तो सांसे थमने लगी लेकिन एसजीएमएच के मरीजों की सांसे उखडऩे लगी थी। आनन फानन में कंपनी से तुरंत रिएजेंट कार्टेज मंगवाया गया। तब मरीजों की जांच शुरू हो पाई।

हर विभाग के लिए आई थी मशीन सिर्फ दो ही निकली

बड़ी ही ताज्जुब वाली बात है। संजय गांधी अस्पताल में कई आईसीयू हैं। यहां गायनी से लेकर शिशु रोग विभाग, मेडिसिन, सर्जरी में आईसीयू कक्ष हैं। यहां सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं लेकिन एबीजी मशीन नहीं थी। सुपर स्पेशलिटी के पास थोक में पीएमजेएसवाय से मशीनें आईं थी। सुपर ने ही एक मशीन मेडिसिन विभाग को दिया। तब जाकर यहां जांच शुरू हो पाई। अभी ऐसा भी नहीं है कि मशीनें खत्म हो गईं। अभी भी आधा दर्जन मशीनें सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के स्टोर में डंप हैैं लेकिन वह कभी निकली ही नहीं।

कबाड़ होते जा रही हैं मशीनें

एक एबीजी की कीमत करीब 6लाख रुपए बताई जा रही है। ऐसी कई मशीनें सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के स्टोर में सालों से बंद है। कई मशीनों की वारंटी तक खत्म हो गई लेकिन यह कहीं इंस्टाल नहीं हुई। सुपर स्पेशलिटी के हर विभाग के लिए एक मशीन आई थी। इनमें से दो ही लगी। यह सारी मशीनें पीएमजेएसवाय योजना के तहत आईं थी। यह अब धीरे धीरे कबाड़ होती जा रही हैं।

इसलिए नहीं लगाई जा रही

इन मशीनों को इंस्टाल करने से जांच के नाम पर प्राइवेट पैथालॉजी के साथ डॉक्टरों की सांठगांठ खत्म हो जाएगी। मोटा कमीशन हाथ से चला जाएगा। वहीं दूसरा प्रबंधन को अलग से कर्मचारी नियुक्त करने पड़ेंगे। कार्टेज खरीदना पड़ेगा। इसका अलग से मेंटीनेंस कराना होगा। इसके कारण इन मशीनों को शुरू करने से हाथ पीछे खींचा जा रहा है।

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