रीवा
बीसी समूह के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। इस ठगी को अंजाम किसी और ने नहीं, बल्कि शहर के ही एक व्यापारी ने दिया है। जमापूंजी नहीं मिलने पर पीड़ित शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और शकायत दर्ज कराये। लिहाजा प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है। लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
फरियादियों का आरोप है कि घोघर निवासी मोहम्मद अली अंसारी उर्फ तुवखू नागक व्यक्ति के द्वारा बीती समूह चलाया जाता था। जिसमें शहर के करीब 2 सौ लोग जुड़े हुये थे। उनके द्वारा हर माह समूह में अपनी श्रमता अनुरूप रुपये जम किये जाते थे। उक्त राशि उन्हें जरूरत पड़ने पर कुछ प्रतिशत अधिक के साथ लौटाई जाती भी। पहले तो समूह ठीक तरीके से चला, लोगों की जमापूंजी फायदे के साथ वापस मिली। लेकिन जब समुह में 200 से अधिक लोग जुड़ गये और करोड़ों रुपये एकत्रित हो गये तो समूह संचालक मोहम्मद अली उर्फ सुकू उक्त राशि को डकार गया। रुपये जमा करने वाले लोगों को जब राशि नहीं मिली तो वा अब पुलिस के दरवाजे में पहुंचे हैं और राशि वापस दिलाने जाने की मंगकर रहे हैं।
शिकायत लेकर पहुंचे पीड़ित अंकुर प्रजापति, विजय साहू, शिवकुमार साहू, प्रमोद साहू समेत अन्य ने बताया कि शुरू के वर्ष में उन्हें बकायदा रुपये मिलते थे। लेकिन वर्ष 2021 के चाद उन्हें फायदा तो दूर जमापूंजी भी नहीं मिली ।
कई बार समूह संचालक में इस संबंध में बात की गई, लेकिन वे बीमारी का बहाना बड़ा कर टलता रहा!
हद तो यह है कि जब समूह संचालक से पीड़ित व्यक्ति मिलने उसके घर पहुंचे और अपनी जमा पूजी भांगी तो उन्होंने पहले बीमारी का बहाना बता कर कई माह टाल दिया। पीड़ितों ने कड़ा रूल अपनाया और पुलिस में जाने की धमकी दी तो समूह संचालक के घर की महिलाएं उन्हें ही झूठे मुकदमें में फंसाने की धमकी देने लगी। यही वजह है कि अब पीड़ितें ने एकत्रित होकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की है।
क्या होता है बीसी समूह
बीसी का अर्थ वित्तीय बचत समूह होता है। इसमें लोग आपस में मिलकर हर माह रूपये एकत्रित करते हैं और उक्त राशि को हर माह बारी-बारी से लेते हैं। इसके लिये बकायदा एक व्यक्ति के पास रुपये एकत्रित किये जाते हैं। हालांकि इसके लिये प्रशासन से लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, लेकिन शहर में कई ऐसे बीसी समुह चल रहे हैं जिनके पास लाइसेंस नहीं है।