होम स्टे का नया अध्याय शुरू, पर्यटकों को मिलेगा आनंद, ग्रामीण परिवेश से भरपूर रहती है होमस्टे के दौरानसंचालन व्यवस्थाएं


हाथ की बनाई पन हथी रोटियां और सरसों के साग का लोग ले रहे आनंद

रीवा। जिले में पहली बार ग्रामीण परिवेश से भरपूर होमस्टे का संचालन शुरू हो गया है। बसामन मामा के समाधि स्थल, 10,000 गायों वाली गौशाला और देशभर में प्रसिद्ध पूर्वा जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटक अब होटलों की बजाय गांवों में रहना पसंद कर रहे हैं। प्रकृति के करीब रहने की चाहत में टूरिस्ट फोर व्हीलर छोड़कर बैलगाड़ी की सवारी कर रहे हैं। यह बदलाव रीवा के पर्यटन परिदृश्य में एक नई दिशा दिखा रहा है। पिछले दिनों केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बसामन मामा क्षेत्र का दौरा किया था. इसी पहल के तहत ग्राम सुधार समितियां स्थानीय जीवनशैली और लोककला को प्रदर्शित करते हुए ग्रामीणों को होमस्टे बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। टूरिज्म विलेज पूर्वा और गोदहा में पर्यटक स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खेलों और बैलगाड़ी की सवारी का आनंद ले रहे हैं।
रीवा जिले में पर्यटन की संभावनाएं पहले से ही व्यापक हैं । यहां दुनिया की एकमात्र व्हाइट टाइगर सफारी है, जिसने 1 जनवरी को 17,000 दर्शकों के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा महामृत्युंजय मंदिर, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठ, 300 फीट ऊंचाई से गिरते जलप्रपात और ऐतिहासिक किले पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं. पहले तक पर्यटक आधुनिक सुविधाओं वाले होटलों में ठहरते थे, लेकिन अब प्रदूषण रहित वातावरण और ग्रामीण जीवन का अनुभव करने के लिए होमस्टे को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ग्रामीणों के लिए यह पहल आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी साबित हो रही है. उनका कहना है कि होमस्टे से आय बढ़ेगी और जिन पशुओं को पहले आवारा कहा जाता था, वे अब बैलगाड़ी की सवारी के लिए उपयोगी हो गए हैं. इससे न केवल पशुओं की देखभाल संभव होगी, बल्कि बैल खेती के अलावा पर्यटन में भी योगदान देंगे। उल्लेखनीय है कि प्रकृति की गोद में बसे इन होमस्टे ने रीवा जिले के पर्यटन को नई ऊंचाई दी है. यह मॉडल न केवल पर्यटकों को अनूठा अनुभव दे रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है. आने वाले समय में यह पहल प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने का सफल उदाहरण बन सकती है।

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