जिसे कर दिया कार्य मुक्त, वह जाने को तैयार नहीं ?

रीवा। स्वास्थ्य विभाग, रीवा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय अंतर्गत स्टोर शाखा में जारी प्रशासनिक आदेशों की अनुपालन को लेकर जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, वह केवल एक विभागीय चूक नहीं बल्कि व्यवस्था की आत्मा पर पड़ता एक गहरा आघात प्रतीत होती है। आदेश तो जारी हो गए, पत्रों पर हस्ताक्षर भी हो गए, किंतु ज़मीनी हकीकत में वही पुरानी मनमानी। जिससे प्रशासनिक उदासीनता अब भी कायम दिखाई दे रही है। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला द्वारा पत्र क्रमांक /मुचिअ/2025/35982 दिनांक 31.12.2025 के माध्यम से फार्मासिस्ट ग्रेड-2 रवि प्रकाश दुबे को जिला स्टोर शाखा के प्रभार से मुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थान जिला चिकित्सालय रीवा में कार्यमुक्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। साथ ही शिवानी शुक्ला फार्मासिस्ट ग्रेड-2 को स्टोर शाखा का प्रभार सौंपने का आदेश भी निर्गत हुआ।
यह संपूर्ण प्रक्रिया संचनालय स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल के पत्र क्रमांक /2/अवि/सेल-टीपी 2025/115-यू भोपाल दिनांक 5.2.2025 के परिप्रेक्ष्य में की गई थी, ताकि सूचना एवं कार्य व्यवस्था को विधिवत सुव्यवस्थित किया जा सके। इसके पूर्व और पश्चात जारी हुए कार्यालयीन आदेशों क्रमांक /स्था/2025/4056-66 दिनांक 7.2.2025 एवं क्रमांक /स्था/2025/9826 दिनांक 22.4.2025—ने स्टोर शाखा, क्रय शाखा एवं एफ पी एल एम आई एस जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारियों को पुनः परिभाषित किया। इन आदेशों का उद्देश्य स्पष्ट था कि औषधि प्रबंधन, आपूर्ति व्यवस्था और जिला चिकित्सालय के संचालन को बाधारहित बनाए रखना।
सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला रीवा द्वारा पत्र क्रमांक /सी.एस/25/5940 दिनांक 4.3.2025 के माध्यम से जिला चिकित्सालय में कर्मचारियों की कमी को रेखांकित करते हुए रवि प्रकाश दुबे को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर तत्काल कार्यमुक्त करने की मांग की गई, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से उचित मानते हुए पुनः निर्देश जारी किए गए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि रवि प्रकाश दुबे तत्काल स्टोर शाखा का प्रभार शिवानी शुक्ला को सौंपकर जिला चिकित्सालय रीवा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। परंतु विडंबना यह है कि आदेशों की इस लंबी शृंखला के बावजूद आज दिनांक तक न तो स्टोर शाखा का प्रभार विधिवत सौंपा गया है और न ही संबंधित कर्मचारी ने अपने मूल पदस्थापना स्थान पर उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह है कि प्रभार से मुक्त किए जाने के बाद भी रवि प्रकाश दुबे की उपस्थिति सीएमएचओ कार्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में लगातार दर्ज की जा रही है। यह स्थिति केवल आदेश की अवहेलना नहीं, बल्कि विभागीय अभिलेखों की पवित्रता, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना पर सीधा प्रहार है।
स्वास्थ्य विभाग, जो जनजीवन से सीधे जुड़ा हुआ तंत्र है, वहां यदि आदेश काग़ज़ों में लागू हों और व्यवहार में नहीं, तो यह स्थिति दवाओं की कमी, आपूर्ति अव्यवस्था और अस्पताल संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव डालना स्वाभाविक है। प्रभार मुक्त होकर भी रजिस्टर में हस्ताक्षर की यह प्रवृत्ति व्यवस्था के भीतर पनपती उस ढील का संकेत है, जो धीरे-धीरे पूरे तंत्र को खोखला कर देती है। अब प्रश्न यह नहीं रह जाता कि आदेश क्यों जारी हुए, बल्कि यह है कि उन आदेशों का सम्मान कौन कराएगा। क्या प्रशासनिक हस्ताक्षर मात्र औपचारिकता बनकर रह जाएंगे, या उन पर अमल भी उतनी ही दृढ़ता से होगा? यदि इस प्रकरण में शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह उदाहरण भविष्य में आदेशों की अवहेलना को मौन स्वीकृति प्रदान करेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की सतत, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था के लिए यह अनिवार्य है कि प्रभार मुक्त होने के बाद उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नाम केवल तकनीकी त्रुटि न मानकर, एक गंभीर प्रशासनिक चूक के रूप में देखा जाए और उसी गंभीरता से उसका समाधान भी किया जाए। तभी व्यवस्था शब्द नहीं, बल्कि विश्वास बन सकेगी।

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