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व्यक्तिगत उन्नति राष्ट्रीय प्रगति का माध्यम बननी चाहिए:प्रधानमंत्री


समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट हों
नई दिल्ली । चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत उन्नति को राष्ट्रीय प्रगति का माध्यम बनना चाहिए। भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए मोदी ने कहा वैदिक मंत्र, “वयं राष्ट्र जागृयाम पुरोहिता: नागरिकों का आह्वान करता है कि वे राष्ट्र को जागरूक और उन्नत बनाने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भला चाहने वाले लोगों के रूप में, हमारा कर्तव्य है कि हम राष्ट्र को जागरूक और उन्नत बनाएं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चूंकि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है, बल्कि यह एक चिन्मय विचार है, जिसकी नींव एक चिन्मय ऋषि ने रखी थी। दशकों की इसकी यात्रा भी ‘चिन्मय संकल्पों’ से भरी रही है। और जो कुछ भी ‘चिन्मय’ है, वह स्वाभाविक रूप से अमर है, वह अमृतमय है। उन्होंने कहा कि 2047 में भारत जब अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, उसी कालखंड में चिन्मय मिशन भी अपनी शताब्दी का वर्ष मनाएगा यानी चिन्मय मिशन की शताब्दी यात्रा और विकसित भारत की यात्रा एक साथ आगे बढ़ेगी। इसलिए हमारे लक्ष्य भी एक हैं, उद्देश्य भी एक है और हमें इस यात्रा को एकसाथ आगे बढ़ाना है। मोदी ने कहा कि बीते दशकों में समय बदला है, देश के सामने नई चुनौतियों पैदा हुई हैं, समाज में नई विकृतियां आई हैं। आज उनके समाधान का दायित्व हम सबके ऊपर है। आज हमें बांटने वाली ताकतों के खिलाफ समाज को एकजुट करना है। हमें आत्मनिर्भरता के लिए देशवासियों को जागरूक करना है। 2047 में विकसित भारत के संकल्प से जन-जन को जोडऩा है। इन उद्देश्यों के लिए हमें और सक्रिय होना है।
मेरी नीतियों के केंद्र में युवा
प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरी नीतियों का केंद्र युवा हैं। मोदी ने कहा लोगों ने मुझे गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया। तब से लेकर पिछले 25 वर्षों तक मैंने सरकार के मुखिया के तौर पर अपनी पूरी क्षमता से देश की सेवा की है। मोदी ने कहा ‘जब देश ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे किए, तो मैंने सोचा कि हमें इस अवसर को न केवल ‘विकसित भारत’ के विजन को प्रेरित करने का एक मंच बनाना चाहिए बल्कि भारत की उस भावना को भी जीवंत करना चाहिए जो अमर विचारों के साथ जीना जानती है, और हजारों वर्षों के अपने अनुभव के आधार पर आने वाली पीढिय़ों के लिए पूरी मानवता की चिंता कर सकती है।’

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