नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को मादक पदार्थों से जुड़े कानून के तहत मामलों में हुई चिंताजनक बढ़ोतरी से निपटने के लिए समर्पित विशेष अदालतें जल्द गठित करने का निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा”मामलों की मौजूदा लंबित स्थिति और एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों में दुर्भाग्यपूर्ण, चिंताजनक बढ़ोतरी को देखते हुए हमारा मानना है कि सभी आवश्यक 419 अदालतों का जल्द से जल्द गठन किया जाना न्याय के हित में और जरूरी है।”
पीठ ने संबंधित सभी अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने और इन विशेष अदालतों के गठन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने यह काम प्राथमिकता के आधार पर छह सप्ताह में पूरा करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ‘इन री क्रिएशन ऑफ स्पेशल एक्सक्लूसिव कोर्ट्स’ नाम से स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले की सुनवाई कर रहा था।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को मौजूदा दो अदालतों के अलावा तीन और एनआईए अदालतें गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
मेरे रिटायरमेंट का इंतजार है
अरावली पहाडिय़ों की परिभाषा और उनके संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा फरवरी 2027 तक बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कमेटी को अब 30 नवंबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि इसके बाद समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कमेटी की मांग पर नाराजगी जताते हुए कहा, “कमेटी ने मूल रूप से मेरे रिटायरमेंट तक मामले को टालने के लिए समय मांगा है।” गौर करने वाली बात है कि चीफ जस्टिस 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे। कोर्ट ने कमेटी से कहा कि जरूरत पड़े तो दिन-रात काम करके तय समयसीमा में रिपोर्ट पूरी की जाए। सीजेआई ने कहा कि अगर किसी खास मुद्दे पर तुरंत फैसला जरूरी हो तो कमेटी उस पर अलग से अंतरिम रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इससे सुप्रीम कोर्ट जरूरी मामलों पर अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किए बिना फैसला ले सकेगा।
वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को मिल रही सुविधाओं की मांगी रिपोर्ट
देश के वरिष्ठ नागरिकों का जीवन बेहतर और सुरक्षित हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को नोटिस जारी कर वृद्धाश्रमों के निर्माण और वहां बुजुर्गों को मिल रही सुविधाओं पर ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्यों को यह बताना होगा कि उनके यहां वृद्धाश्रमों की क्या स्थिति है और बुजुर्गों को क्या बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं।
