एसआईआर के तहत13-14 करोड़ नाम हटाना स्कैम’: पूर्व सीईसी


हर नागरिक को मतदाता बनने का मौलिक अधिकार
भुवनेश्वर :पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को ‘अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण’ बताया। कुरैशी ने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना एक ‘स्कैम’ है। उन्होंने दावा किया कि एक कृत्रिम प्रक्रिया के जरिए करीब 15 प्रतिशत आबादी को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया।
पूर्व सीईसी कुरैशी ने कहा कि देशभर में करीब 13 से 14 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रुख पर भी हैरानी जताई। कुरैशी के मुताबिक, अदालत ने इस मामले में बहुत नरम रुख अपनाया, जिससे यह प्रक्रिया जारी रह सकी। उन्होंने कहा कि हटाए गए लोगों में करीब 90 प्रतिशत लोग मतदान के योग्य हैं। इसी पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सभी लोग दूसरे स्थानों पर चले गए हैं? कुरैशी ने यह भी कहा कि अगर कोई मतदाता दूसरी जगह चला गया है, तो उसका नाम नई जगह की मतदाता सूची में जोड़ा जाना चाहिए। केवल नाम हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर कुछ मतदाता पलायन कर गए हैं, तो उनके नाम नई जगह पर जोड़े जाने चाहिए। हैरानी की बात है कि केवल नाम हटाए जा रहे हैं। क्या कोई दूसरी जगह से यहां नहीं आ रहा? क्या सिर्फ बाहर जाना ही हो रहा है? यह पूरी तरह अतार्किक, अनुचित, मनमाना और शरारतपूर्ण है। एसवाई कुरैशी ने कहा कि भारत के हर नागरिक को मतदाता बनने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर एक भी योग्य व्यक्ति का नाम किसी कारण या बहाने से हटाया जाता है, तो यह असांविधानिक और गैरकानूनी है। उन्होंने इसके लिए जवाबदेही तय करने और आपराधिक जिम्मेदारी की बात भी कही। उनका कहना था कि प्रक्रियागत या नौकरशाही कारणों से किसी नागरिक का मौलिक अधिकार नहीं छीना जा सकता। उन्होंने कहा कि 2002 की मतदाता सूची में भी गलतियां हो सकती हैं। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पिता का नाम भी 2002 की सूची में गलत लिखा गया था। इसलिए उनके मुताबिक इस सूची का इस्तेमाल केवल संदर्भ के लिए किया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया ‘क्या यह बाइबल से आई थी? क्या 2002 की मतदाता सूची में कोई गलती नहीं थी?’

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