राजनीति और युद्ध एक दूसरे के पूरक:जनरल चौहान


नई दिल्ली : पूर्व चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ जनरल अनिल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक शासन के बीच संबंधों का स्पष्ट विश्लेषण किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सैन्य शक्ति राजनीतिक इच्छाशक्ति का ही सीधा विस्तार है। कार्ल वॉन क्लॉज़विट्ज़ के इस प्रसिद्ध कथन का जि़क्र करते हुए कि युद्ध राजनीति को दूसरे तरीकों से आगे बढ़ाने का ही एक रूप है, जनरल चौहान ने कहा कि किसी देश के राजनीतिक हित सर्वोपरि होते हैं। इस ढांचे में, सशस्त्र बल उन हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध कई राष्ट्रीय साधनों में से केवल एक साधन के तौर पर काम करते हैं।
जनरल चौहान ने कहा राजनीति और युद्ध एक-दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते। क्लॉज़विट्ज़ ने कहा था कि युद्ध राजनीति को दूसरे तरीकों से आगे बढ़ाने का ही एक रूप है। किसी देश के राजनीतिक हित सबसे अहम होते हैं वे सर्वोपरि हैं, और सशस्त्र बल उनकी रक्षा करने वाले साधनों में से एक हैं – बस एक साधन। ऐसे कई साधन हैं। एक राजनीतिक लोकतंत्र में, जब सरकार बल प्रयोग करने पर विचार करती है, तो जनरल चौहान ने सैन्य नेतृत्व की दोहरी जि़म्मेदारी पर ज़ोर दिया। खास रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सैन्य विकल्पों की एक विविध सूची देकर लचीले विकल्प तैयार करना और रणनीतिक भरोसा पैदा करना साथ ही सरकार को यह भरोसा दिलाना कि अगर शांति के समय रक्षा क्षमताओं में पर्याप्त निवेश किया गया हो, तो सेना इन विकल्पों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकती है। पूर्व चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ ने कहा और एक राजनीतिक लोकतंत्र में, जब भी सरकार अपने राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बल प्रयोग करने का फ़ैसला करती है, तो मुझे लगता है कि सशस्त्र बलों, रक्षा बलों या सेना की भूमिका दोहरी होती है।
ऑपरेशन सिंदूर दूसरी कार्रवाईयों से अलग
पूर्व सीडीएस ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पिछली सैन्य कार्रवाइयों से इस मामले में अलग था कि इसमें रणनीति को लेकर कोई भी अनिश्चितता या हिचकिचाहट नहीं दिखाई गई। जहां उरी हमले के बाद भारत ने जमीनी रास्ते से सर्जिकल स्ट्राइक की थी और पुलवामा के बाद भारी सैन्य बल के साथ हवाई हमले का रुख अपनाया था। ऑपरेशन सिंदूर’ में एक नया और अनूठा रास्ता चुनते हुए निचले हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया गया। इस सोची-समझी रणनीति का मुख्य उद्देश्य सीधे संघर्ष के जोखिम को न्यूनतम करना, ऑपरेशन की शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करना और दुश्मन को संभलने का मौका दिए बिना अचानक व सटीक प्रहार करना था। पूर्व सीडीएस ने कहा कि ऐसे ऑपरेशन्स के मूल्यांकन के लिए व्यापक नजरिए की आवश्यकता होती है। इसके तहत ऑपरेशन के दौरान सामने आई कमियों को पहचानना, उन्हें सुधारने के लिए कदम उठाना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुसार खुद को ढालना बेहद आवश्यक है।

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