जटिल होती सामाजिक व्यवस्था के साथ अदालतों पर भी दबाव बढ़ रहा: सीजेआई


नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि बढ़ती और जटिल होती सामाजिक व्यवस्था के साथ अदालतों पर भी दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स न्याय व्यवस्था की क्षमता मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इन परिसरों की खासियत सिर्फ नई इमारतें जुडऩा नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए न्याय को अधिक सुलभ बनाना है। परिसरों में मेडिएशन हॉल की व्यवस्था संस्थागत रूप से मध्यस्थता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दिखाती है, ताकि हर विवाद को लंबी सुनवाई से गुजरना जरूरी न हो। फैमिली कोर्ट में अलग-अलग क्यूबिकल वाले काउंसलिंग रूम लोगों को निजी और सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने महिला वकीलों के लिए अलग हॉल बनाए जाने की भी सराहना की और कहा कि न्याय व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए उन्हें सम्मानजनक और समान पेशेवर माहौल मिलना चाहिए। उनके मुताबिक आधुनिक न्यायिक संस्थान को लोगों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होने के साथ संवाद, समझौते और गरिमा के लिए भी पर्याप्त जगह देनी चाहिए। सूर्यकांत ने केरल के ओणम पर्व के दौरान बनाए जाने वाले पारंपरिक फूलों के कालीन पुक्कलम’ का उदाहरण देते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था भी उतनी ही समावेशी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग रंग, आकार और प्रकार के फूल मिलकर पुक्कलम को सुंदर बनाते हैं और उसी तरह न्याय व्यवस्था में शहरों, ग्रामीण इलाकों और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए जगह होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि न्याय व्यवस्था उसकी अपनी है।

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