ज्ञान, सत्ता और सुंदरता परमानेंट नहीं रहते : गडकरी

ईरान वार की वजह से डामर का भाव चालीस पर्सेंट बढ़ गया
भोपाल: सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ज्ञान, सत्ता और सुंदरता ये परमानेंट नहीं रते. रायसेन में उन्नत कृषि महोत्सव के समापन में पहुंचे नितिन गडकरी ने बताया कि ईरान-इजराइल संकट के समय में जिस पेट्रोल, डीजल और गैस के इंपोर्ट पर जो बाइस लाख करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं. उसमें से आधा भारत के किसानों की जेब में भी जा सकता है.
गडकरी ने कहा, जिस पराली से दिल्ली में प्रदूषण होता था. उससे एक लाख लीटर प्रतिदिन और 78 हजार टन प्रतिसाल सस्टेनेबेल एविएशन फ्यूल तैयार हो रहा है. गडकरी ने मीडिया को लेकर कहा कि रिकार्ड कर लेना मैं झूठ नहीं बोलता.केन्द्रीय मंत्री ने कहा मैं यहां एक मंत्री की हैसियत से नहीं एक किसान की तरह आया हूं. उन्होंने कहा कि जिस पराली की वजह से दिल्ली प्रदूषित होता था. पानीपत में प्रोजेक्ट लगाकर हम उस पराली से एक लाख लीटर परडे इथेनॉल तैयार कर रहे हैं. उन्होने कहा कि आज हम 22 लाख करोड़ रुपये के पेट्रोल-डीजल, गैस विदेशों से आयात में खर्च कर रहे हैं. अगर इस 22 लाख करोड़ में से दस लाख करोड़ किसानों के जेब में जाएगा, तो सोचिए गांव की तस्वीर किस तरह से बदल जाएगी.उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली से मुंबई 12 घंटे लगते थे. अब हाईवे के बाद ये सफर आठ घंटे में हो जाएगा. इसी तरह चेन्नई से बंगलुरु हाईवे अब केवल दो घंटे में पहुंच जाएंगे. उन्होंने कहा मैं मीडिया से कहता हूं कि मेरा भाषण रिकार्ड कर लेना क्योंकि मैं जो करता हूं वो बोलता हूं. मैं झूठ नहीं बोलता. एक भी बात पूरी नहीं हो तो ब्रेकिंग न्यूज लगा देना. नितिन गडरी ने कहा सीएसआईएआर को मैंने बहुत सपोर्ट किया. वहां बायो मास से डामर तैयार हुआ है. देश में एक सौ दस लाख टन डामर लगता है. रिफाइनरी की क्षमता पचास लाख टन है. साठ लाख टन इम्पोर्ट होता है. उन्होंने कहा कि अभी ईरान वार की वजह से डामर का भाव चालीस पर्सेंट बढ़ गया है. हमारी सेंट्रल रिसर्च रोड ऑर्गनाइजेशन ने 23 लोगों को पेंटेट दिया है. मध्य प्रदेश के नजदीक मनसर एक इलाका है, जहां एक किलोमीटर की पूरी सडक़ किसानों के तैयार हुए डामर से ही बनाई गई है. नितिन गडकरी ने मंजूर किया कि देश के किसानों के सामने चुनौतियां भी हैं. उन्होने कहा मैं जिस क्षेत्र से आता हूं वहां 15 हजार किसानों ने आत्महत्या की है. कॉटन में हुए नुकसान की वजह से उन्होंने आत्महत्या कर ली.उन्होंने किसानों को मंत्र दिया, घर का पानी घर में, खेत का पानी खेत में, जमीन का पानी जमीन में जाए.

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