एमपी-राजस्थान के अफसरों को लगाई फटकार, चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा


क्या लोगों के मरने के बाद आपकी रिपोर्ट आएगी
नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर रोक लगाने में नाकाम रहने के लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य तंत्र के अस्तित्व पर ही सवाल उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा “यह सब आपकी नाक के नीचे हो रहा है। हलफनामों में लिखा है कि आपके पास हथियार नहीं हैं। फिर राज्य सरकार का अस्तित्व ही क्यों है? यह बहुत अजीब बात है। खनन माफिया जिन खुदाई मशीनों और बुलडोजरों का इस्तेमाल करते हैं, वे धर्मनिरपेक्ष हैं। वे लोगों की जाति नहीं देखते। इसके विपरीत। हमें यहीं रुक जाना चाहिए। बेहद दुखद स्थिति है। राज्य सरकारें पूरी तरह विफल हो चुकी हैं या यूं कहें कि वे मिलीभगत कर रही हैं।”कोर्ट ने सवाल किया “क्या वह रिपोर्ट पुल गिरने और लोगों की मौत होने के बाद आएगी?” एएसजी ने जवाब दिया कि रिपोर्ट 1 हफ्ते में दे दी जाएगी। जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि राज्य ने आखिर खुदाई की अनुमति क्यों दी? जस्टिस ने कहा “राज्य ने इसकी अनुमति क्यों दी? क्या राज्य के अधिकारी अंधे हैं।” जस्टिस मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि माफिया किस प्रकार राज्य के अधिकारियों को निशाना बना रहा था।
इजाजत दी तो बिगड़ जाएगी व्यवस्था
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से नाम कटने वाले उन मतदाताओं को बड़ा झटका लगा है, जिनकी अपीलें ट्रिब्यूनलों के सामने पेंडिंग हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिनका नाम वोटर लिस्ट हट गया है, वो विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के मामले में कहा है कि जब तक संबंधित अपीलों पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक ऐसे व्यक्तियों को वोट देने की इजाजत देना कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ होगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। इस पर सीजेआई ने कहा कि अगर ऐसे लोगों को वोट देने की अनुमति दी जाती है, तो यह व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी।
बांके बिहारी मंदिर केमौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में मौजूदा धार्मिक रीति-रिवाजों में किसी तरह का दखल नहीं देगा। बांके बिहारी मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिर के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा “हम मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं हैं।” यह पूरा विवाद एक उच्च अधिकार समिति के गठन को लेकर शुरू हुआ है। इस समिति का गठन अदालत की ओर से मंदिर के मामलों को देखने के लिए किया गया था। इस समिति में 12 सदस्य थे और इसकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंपी गई थी। इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने अदालत को बताया कि समिति न्यायिक दिशा-निर्देशों के दायरे में काम कर रही है और उसका कोई गलत इरादा नहीं है।

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