लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई न्यायपालिका :पूर्व जस्टिस

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस ए.एस. ओका ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका संविधान के तहत नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था अपनी तारीफ करने में अक्सर यह भूल जाती है कि आम लोगों का अदालतों में असली अनुभव कैसा होता है। जस्टिस अभय एस ओका ने कहा “आम आदमी, भारत के नागरिकों को इस कानूनी व्यवस्था से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन किसी न किसी तरह हमारी न्यायपालिका उन सभी उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकी।” उन्होंने कहा “यदि कोई यह कहे कि आम आदमी को न्यायपालिका पर बहुत भरोसा है तो यह बात न्यायपालिका प्रणाली से बाहर के लोगों द्वारा कही जानी चाहिए न कि वकीलों या न्यायाधीशों द्वारा। पूर्व न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का संविधान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की गारंटी देता है और कहा कि यह वादा तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक कि अदालतें गुणवत्तापूर्ण और जल्दी न्याय नहीं दे देतीं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के मुद्दों में न केवल जमानत और मुकदमे से पहले की कैद शामिल है, बल्कि पर्यावरणीय क्षति भी शामिल है। उन्होंने यह राय व्यक्त की कि पर्यावरण संबंधी मामले भी स्वतंत्रता के मामले हैं क्योंकि प्रदूषण मुक्त वातावरण का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत एक अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि मैंग्रोव के बड़े पैमाने पर कटाई भी स्वतंत्रता का मुद्दा बन जाती है क्योंकि हम नहीं जानते कि 6 साल या 10 साल बाद इसका कितना विनाशकारी प्रभाव होगा। उन्होंने बताया कि मुंबई आए वे लोग जो कानूनी तौर पर आवास का खर्च वहन नहीं कर सकते, उन्हें अवैध रूप से बनी झुग्गियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जहां उन्हें अक्सर ज्यादा किराया चुकाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह मुकदमों का एक महत्वपूर्ण कारण बन गया है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *