नई दिल्ली: जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने कहा है कि जातिगत गणना इस प्रक्रिया के दूसरे चरण के दौरान की जाएगी, जिसे जनसंख्या गणना के नाम से जाना जाता है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा, “जनगणना के दूसरे चरण के दौरान जाति गणना की जाएगी।”जनगणना की शुरुआत 1 अप्रैल से स्व-गणना के साथ होगी। इसके बाद 16 अप्रैल से नामित गणनाकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर जनसंख्या सूचीकरण अभियान चलाया जाएगा। पहले चरण को अप्रैल और सितंबर 2026 के बीच पूरा करना है।
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने लोगों से जनगणना करने वालों को सही जानकारी देने की अपील करते हुए आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा तथा इसे किसी साक्ष्य या किसी योजना का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत सभी व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहती है। इसे सूचना का अधिकारके तहत साझा नहीं किया जा सकता, न ही अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकता है और न ही किसी सरकारी या निजी संस्था के साथ साझा किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय डेटा का उपयोग केवल संकलन के लिए किया जाएगा। महापंजीयक ने कहा कि जाति से संबंधित डेटा दूसरे चरण में एकत्र किया जाएगा और इसके प्रश्न व्यापक चर्चा के बाद तय किए जाएंगे। मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि पहली बार स्व-गणना की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसमें लोग जनगणना के पहले चरण से पहले 15 दिनों की अवधि में डिजिटल रूप से अपनी जानकारी जमा कर सकते हैं। उन्होंने कहा “पहले डेटा कागज पर एकत्र किया जाता था, जिससे डिजिटलीकरण में काफी समय लगता था। अब शुरुआत से ही डिजिटल डेटा मिलेगा, इसलिए हम बहुत जल्दी डेटा जारी कर सकेंगे। मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि यह सुविधा केवल देश में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। डेटा की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डेटा सेंटरों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया गया है।
16अप्रैल से शुरू होगा जनगणना का काम, व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा :जनगणना आयुक्त