प्रयागराज :इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि पिता के बाद बच्चे पर मां का प्राकृतिक हक होता है। एक फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम 1956 के अनुसार पिता के बाद मां नाबालिग बच्चे की प्राकृतिक अभिभावक होती है। अदालत ने इसी अधिनियम के आधार पर कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। अपने आदेश में जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एक बेंच ने कहा, “अपीलकर्ता मां ने आवेदन देकर अनुरोध किया था कि वह अपनी नाबालिग बेटी की उच्च शिक्षा के लिए संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में उसकी 1/4 हिस्सेदारी बेचने की अनुमति चाहती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने कक्षा 12 की परीक्षा दी है और आगे अपने करियर को जारी रखना चाहती है जिसके लिए काफी पैसे की जरूरत है।” बेंच ने अपने बयान में कहा “अपीलकर्ता कानून के तहत नाबालिग की प्राकृतिक अभिभावक हैं, वयस्क सदस्य होने के नाते संयुक्त पारिवारिक संपत्ति की प्रबंधक के तौर पर काम कर सकती हैं और बच्चे के हित के लिए उसकी हिस्सेदारी बेच सकती हैं।
यत्र तत्र सर्वत्र