नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि न्याय सभी का अधिकार है, न कि कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में परिवर्तन, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और दक्षता में सुधार करके एक अधिक नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मुकदमेबाजी से पहले कानूनी सलाह विवादों को शीघ्र हल करने, अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने और अदालतों के बोझ को कम करने में मदद कर सकती है। उन्होंने भाषाई समावेशिता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि संविधान को कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने समझ और भागीदारी बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषाओं में कानूनी परामर्श प्रदान करने का भी आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से महिलाओं, ग्रामीण और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए, समाज के आखिरी शख्स तक कानूनी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित प्रयासों का आग्रह किया। उन्होंने न्याय तक पहुंच का विस्तार करने में जमीनी स्तर पर योगदान देने के लिए पैरा-लीगल स्वयंसेवकों, कॉमन सर्विस सेंटरों, पैनल वकीलों और अन्य हितधारकों की सराहना की।
न्याय कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार नहीं : उपराष्ट्रपति