छोटी-छोटी बातों पर एफआईआर दर्ज हो रही
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कई जज राजा से ज्यादा वफादार जैसी मानसिकता से काम कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि कुछ जज जरूरत होने पर भी जमानत नहीं देते, जिससे लोग महीनों और वर्षों तक जेल में पड़े रहते हैं। जस्टिस भुयान ने साफ कहा कि न्यायपालिका के अंदर ही कुछ लोग जांच एजेंसियों के प्रति जरूरत से ज्यादा झुकाव रखते हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ता है, जबकि कई मामलों में वे दोषी भी साबित नहीं होते।
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान ने चिंता जताई कि आजकल बहुत मामूली मामलों में भी एफआईआर दर्ज हो रही है। जैसे, सोशल मीडिया पोस्ट या मीम, छात्रों के प्रदर्शन, सामान्य विरोध या आंदोलन। इन मामलों में जांच चलती रहती है और बाद में ये केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाते हैं, जिससे कोर्ट का समय भी बहुत खर्च होता है। उन्होंने आंकड़े बताते हुए कहा पीएमएलए में हजारों केस दर्ज हुए लेकिन बहुत कम मामलों में ट्रायल पूरा हुआ। यूएपीए में भी गिरफ्तारी बहुत ज्यादा लेकिन सजा बहुत कम। उदाहरण के तौर पर साल 2019 में 1984 गिरफ्तारियां, लेकिन सिर्फ 34 को सजा मिली है, वहीं साल 2022 में 2636 गिरफ्तारियां, लेकिन सिर्फ 41 को सजा मिली। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 95 प्रतिशत लोगों के बरी होने की संभावना है, तो उन्हें वर्षों तक जेल में क्यों रखा जाए? जस्टिस भुयान ने कहा कि असली विकसित भारत वही होगा जहां असहमति को अपराध न माना जाए और अलग-अलग विचारों को सहन किया जाए। इसके साथ ही समाज में बराबरी और न्याय हो। उन्होंने कहा कि अगर लोग अपने विचार भी नहीं रख सकते, तो वह विकसित समाज नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि देश में सबसे ज्यादा केस सरकार ही करती है। कई बार अधिकारी बिना वजह अपील कर देते हैं, जिससे कोर्ट पर बोझ बढ़ता है। उन्होंने बताया कि एक जज को रोज 400-500 केस सुनने पड़ते हैं, कई बार जज थकान और दबाव में काम करते हैं।
कई जज राजा से ज्यादा वफादार जैसी मानसिकता से काम कर रहे :जस्टिस भुयान