मुंबई:भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि मध्य-पूर्व के युद्ध की वजह से बाजारों में घबराहट जरूर बढ़ी है, लेकिन ऐसी ज्यादा अस्थिरता हमेशा नहीं रहती। उन्होंने बताया कि अभी दुनिया में कई कारणों से अनिश्चितता बढ़ी हुई है जैसे भू-राजनीतिक तनाव, नई तकनीकी चुनौतियां और ऊर्जा संकट। खासकर मध्य-पूर्व के संघर्ष से तेल और ऊर्जा की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर शेयर बाजारों पर भी पड़ा है।
सेबी प्रमुख ने खुदरा निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव से घबराकर जल्दबाजी में फैसले न लें। उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि बड़े वैश्विक संकटों के बाद भी बाजार समय के साथ फिर से संभला है। इसलिए निवेशकों के लिए सबसे अच्छी रणनीति धैर्य रखना और लंबी अवधि पर ध्यान देना है। उन्होंने कहा कि अस्थिरता आधुनिक वित्तीय बाजारों की एक प्रमुख विशेषता बन गई है। खासकर सूचना के बदलते परिवेश और अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से फैलने वाले झटकों के कारण। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे दौर स्थायी नहीं होते। एक बात स्पष्ट है कि अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहीं रहते। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के कारण अस्थिरता पैदा होने के बावजूद, भारत के पूंजी बाजार मजबूत हो रहे हैं और तेजी से लचीले बन रहे हैं। पांडे ने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार आकार, विविधता और मजबूती में विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कह”ये बाजार गहन, विविध और अधिक लचीले होते जा रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे बाजार आकार और जटिलता में बढ़ते हैं, वे वैश्विक घटनाक्रमों से भी अधिक निकटता से जुड़ते जाते हैं। और यही हमें उस बदलते परिदृश्य की ओर ले जाता है जिसमें आज का बाजार काम करता है। उन्होंने कहा कि खबरें तेजी से फैलती हैं, राय उससे भी तेज गति से फैलती हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज बाजार इन बातों पर लगभग तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं।
अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहीं रहते :सेबी प्रमुख