बजट से पहले राष्ट्रपति का संबोधन, राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुटता का आह्वान; विपक्ष ने की मनरेगा की वापसी की मांग

नई दिल्ली। राजनीतिक व्यवस्था में गहरी होती कुटता-मतभेदों के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल से लेकर वाजपेयी जैसी हस्तियों का उल्लेख करते हुए सभी सांसदों से दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुटता का आहृवान किया है।

संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प, आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी अभियानों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एकजुटता सांसदों जरूरी है।

राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर की प्रशंसा की

राष्ट्र से जुड़े ऐसे विषय सभी मतभेदों से परे हैं। वहीं ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी तरह के आतंकी कृत्य का निर्णायक कार्रवाई से जवाब दिया जाएगा।

इस दौरान राष्ट्रपति ने एनडीए सरकार की आर्थिक-सामाजिक योजनाओं-कार्यक्रमों की सफलताएं गिनाते हुए जीएसटी सुधार तथा चार लेबर कोड लाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार ‘सुधार एक्सप्रेस’ की गति को तेज करती रहेगी।

पुराने नियमों-प्रविधानों को भविष्य की जरूरत के हिसाब से निरंतर बदला जा रहा है और इसीलिए चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही है।राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ ही बुधवार से संसद के बजट सत्र की शुरूआत हुई।

दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को किया संबोधित

नई संसद के लोकसभा कक्ष में दोनों सदनों के सांसदों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विभिन्न मतों, अलग-अलग विचारों के बीच, ये सर्वमान्य है कि राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं। महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, बाबा साहेब, सरदार पटेल, जेपी, लोहिया, पंडित दीन दयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी सभी इसी विचार के रहे कि लोकतंत्र में विषयों पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ विषय मतभेदों से परे हैं।

विकसित भारत का संकल्प, राष्ट्र की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, स्वदेशी का अभियान, एकता के लिए प्रयास, स्वच्छता, राष्ट्र से जुड़े ऐसे विषयों पर सांसदों को एकमत होना ही चाहिए। संविधान की भावना भी यही है और इसलिए हर सांसद राष्ट्र हित के विषयों पर एकमत हों तथा देश की प्रगति में नई ऊर्जा भरें।

विकसित भारत के लक्ष्य के लिए कदमों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बीते 11 वर्षों में आर्थिक नींव बहुत मजबूत हुई है। दुनिया में अनेक संकटों के बावजूद भारत सबसे तेज बढ़ती आर्थिकी है और महंगाई दर रिकार्ड न्यूतनम पर है। सरकार की नीतियों से लोगों की आय और बचत बढ़ी है तथा खरीद शक्ति में भी वृद्धि हुई है।

‘गरीबों और मध्यम वर्गीय परिवारों को हो रहा फायदा’

यूरोपियन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार पर हुई सहमति ऐतिहासिक कदम है जिससे भारत में मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को गति मिलेगी तथा युवाओं के लिए रोजगार के मौके बनेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ‘सुधार एक्सप्रेस’ के पथ पर चल रही है और जीएसटी में ऐतिहासिक नेक्स्ट जनरेशन रिफार्म ने उत्साह बढ़ाया है।

आयकर टैक्स कानून में बदलाव कर 12 लाख रुपए तक की आय कर मुक्त करने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को फायदा हो रहा है तो अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। चार नए लेबर कोड को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि लंबे समय से देश की श्रम-शक्ति दर्जनों कानूनों में उलझी हुई थी।

राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के बाद भारत की प्रगति को कुछ शहरों और क्षेत्रों से ज्यादा गति मिली मगर बहुत बड़ी आबादी को उचित अवसर नहीं मिल पाया। इसलिए सरकार पिछड़े क्षेत्रों और वंचित आबादी के साम‌र्थ्य को विकसित भारत की ऊर्जा बना रही है।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा के समुद्री क्षेत्र में प्रगति की नई संभावनाएं बन रही है। पूर्वोत्तर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। अब वो दिन भी दूर नहीं जब असम में बनी सेमीकंडक्टर चिप दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लाइफलाइन बनेगी।

समानता संबंधी यूजीसी के नए नियमों पर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार दलितों, पिछड़ों, हाशिए पर खड़े लोगों और आदिवासी समुदायों सभी के लिए पूरी संवेदनशीलता” के साथ काम कर रही है। सामाजिक न्याय के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और तीसरे कार्यकाल में गरीबों को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं।

देश की 95 करोड़ आबादी को सामाजिक सुरक्षा के लाभ मिल रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।मनरेगा को खत्म कर जीबी जीरामजी कानून लाने पर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों से निपटने और सरकारी फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने में सफल रही है।

वीबी जीरामजी की पहल 125 दिनों के काम की गारंटी देगी, भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकेगी और ग्रामीण विकास को नई गति देगी। राष्ट्रपति ने जीरामजी को उपलब्धि के रूप में पेश किया तो विपक्षी सांसदों ने इसके खिलाफ स्वर उठाते हुए जोरदार विरोध किया तो राष्ट्रपति को कुछ क्षण अपना भाषण रोकना पड़ा।

विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्षी सदस्यों ने नया कानून वापस लेने और मनरेगा की वापसी की आवाज बुलंद की। जवाब में सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसके समर्थन में मेजें थपथपाईं। राष्ट्रपति ने माओवादी हिंसा पर निर्णायक प्रहार से लेकर ऑपेरशन सिंदूर को सरकार की सफलताओं में गिनाया।

वहीं एआई के दुरुपयोग से पैदा हो रहे खतरों को गंभीरता से लिए जाने की वकालत करते हुए कहा कि डीप फेक, दुष्प्रचार तथा फेक कंटेंट लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और जनता के विश्वास के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने एक घंटे से अधिक के अपने संबोधन के दौरान पीएम गरीब कल्याण, पीएम आवास, आयुष्मान भारत, ढांचागत निर्माण परियोजनाओं से लेकर सरकार की तमाम फ्लैगशिप योजनाओं की उपलब्धियां भी गिनाई। 

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