विंध्य भारत, रीवा
भारत सरकार के अमृत-2.0 मिशन के अंतर्गत पेयजल और सीवरेज परियोजनाओं के काम की संभागवार निगरानी शुरू कर दी गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने राज्य स्तर पर अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अमृत-2.0 के काम में खामियां मिली, तो संबंधित ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। काम से जुड़े अधिकारियों की लापरवाही सामने आई, तो उनके विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इसको लेकर विभाग ने निगरानी सेल बनाई है। इनमें सिविल और तकनीकी कार्यों को विभाजित कर समीक्षा भी की जा रही है। जिसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जा रही है। इधर, नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने अमृत-2.0 की कई परियोजनाओं में अत्यंत धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ड्राइंग-डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों एवं पीडीएमसी टीम की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए। दरअसल, त्रुटिपूर्ण डीपीआर के कारण कई परियोजनाओं में विलंब हो रहा है। इसे तैयार करने वाले सलाहकारों की समीक्षा कर दोष पाए जाने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। परियोजनाओं की आनलाइन मानिटरिंग, प्रगति की डिजिटल रिपोर्टिंग और पोर्टल आधारित समीक्षा से जवाबदेही सुनिश्चित होगी। इधर, आयुक्त भोंडवे ने नगरीय निकायों के अधिकारियों स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति प्रतिदिन पोर्टल पर अद्यतन करें तथा बिना पूर्व अनुमति किसी भी परियोजना में ईओटी जारी न करें। बता दें कि दो दिन पहले ही आयुक्त भोंडवे ने अमृत-2.0 प्रोजेक्ट के कार्यों की धीमी प्रगति पर 13 ठेकेदार ब्लैक लिस्ट किया है तो, छह को निलंबित किया जा चुका है। अमृत-2.0 प्रोजेक्ट के काम की स्थिति नगरीय निकायों में ठीक नहीं है। इनमें रीवा , सतना, पन्ना, कटनी में न तो पेयजल सप्लाई का काम पूरा हो पाया है और न ही सीवरेज की लाइन डाली जा सकी। रीवा में सीवरेज पाइपलाइन बिछाना तो एक समस्या के रूप में उभर कर सामने आई है। जगह-जगह सडक़े खोद दी गई है और नियम के मुताबिक उन्हें बनाया नहीं गया है जिससे शहर के मोहल्ले में आवा गवन काफी परेशानी भरा हो चुका है। सत्ता पक्ष के लोग भी जहां इस गतिविधि से काफी परेशान है वहीं नगर निगम के महापौर द्वारा भी कई बार चेतावनी की जा चुकी है लेकिन उसके बावजूद कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। के तीन और पेयजल सप्लाई का एक प्रोजेक्ट है, लेकिन यहां भी काम की प्रगति संतोषजनक नहीं है। भोपाल नगर निगम में भी सीवरेज का काम अधूरा है।