विंध्यभारत, रीवा
यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत ढेकहा तिराहे पर हुई एक दिन की चेकिंग में सामने आ गई। इस जांच ने साफ कर दिया कि जिले की बड़ी संख्या में यात्री बसें बिना जरूरी सुरक्षा इंतजामों के सडक़ों पर दौड़ रही हैं और यात्रियों की जान सीधे तौर पर जोखिम में डाली जा रही है। ढेकहा तिराहे पर हुए सघन चेकिंग अभियान के दौरान करीब 50 से अधिक वाहनों को रोका गया, जिनमें अधिकांश यात्री बसें थीं। जांच के दौरान सामने आया कि कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स बिल्कुल नहीं था, जबकि कई बसों में फायर एक्सटिंगिवीशर मौजूद ही नहीं मिले।
इससे भी ज्यादा चिंताजनक स्थिति यह रही कि जिन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स पाए गए, उनमें रखी दवाएं एक्सपायर हो चुकी थीं। वहीं, कई बसों में लगे फायर सिलेंडर या तो पूरी तरह खाली थे या उपयोग के लायक नहीं थे। आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए जो इंतजाम अनिवार्य हैं, वे सिर्फ नाम मात्र के रह गए हैं। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाली 20 यात्री बसों पर चालानी कार्रवाई की गई।
एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में चालान होना यह बताने के लिए काफी है कि जिले में चल रही अन्य बसों की स्थिति भी इससे अलग नहीं होगी। बस संचालकों द्वारा सुरक्षा मानकों को लेकर की जा रही अनदेखी लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। इस कार्रवाई के बाद बस चालकों और संचालकों में हडक़ंप मच गया है। वहीं, आम यात्रियों का कहना है कि वे रोज इन्हीं बसों से सफर करते हैं, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि बस में आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई इंतजाम है भी या नहीं। इस पूरे मामले में यातायात थाना प्रभारी अनिमा शर्मा ने कहा, यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच के दौरान कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिले, कई में दवाएं एक्सपायर थीं और फायर सिलेंडर या तो खाली थे या काम करने की स्थिति में नहीं थे। नियमों का उल्लंघन करने वाली 20 बसों पर चालानी कार्रवाई की गई है। आगे भी इस तरह की चेकिंग लगातार जारी रहेगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।