कुलपति के हठ के सामने बौने साबित हो रहे अवर सचिव

विंध्यभारत, रीवा

अवधेश प्रताप ङ्क्षसह में कुर्सी मोह खत्म नहंी हो रहा है। कुलसचिव के प्रभार पर वर्षों से प्रतिनियुक्ति में जमें कैमेस्ट्री प्रोफेसर को मूल विभाग लौटने का आदेश जारी कर दिया गया है। विवि की उप कुलसचिव को ही प्रभार का आदेश जारी हो गया है लेकिन उन्हें कुलपति प्रभार नहीं दिला रहे। कुलसचिव को मूल विभाग के लिए मुक्त नहीं किया जा रहा। यह सीधे तौर पर महिला सम्मान का अपमान है। एक तरफ सरकार महिलाओं को बराबरी का दर्जा दे रही है। उन्हें आगे बढ़ा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ कुलपति महिला अधिकारी को पद के काबिल ही नहीं समझ रहे।
अवधेश प्रताप ङ्क्षसह विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर पिछले 5 सालों से प्रो सुरेन्द्र सिंह परिहार पदस्थ थे। उनकी मूल पदस्थापना जीडीसी में है। वह रसायन शास्त्र के प्रोफेसर हैं। प्रतिनिुयक्ति में वर्ष 2021 से अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर पदस्थ थे। 24 दिसंबर को आदेश जारी कर उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी गई। अवर सचिव वीरन सिंह भलावी ने आदेश जारी कर प्रो सुरेन्द्र सिंह परिहार को कुलसचिव से मुक्त करते हुए उप कुलसवि नीरजा नामदेव को कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को जारी हुए 3 सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है लेकिन पदों में बदलाव नहीं किया जा रहा है। कुलपति प्रो सुरेन्द्र सिंह परिहार को मुक्त नहीं कर रहे हैं। इसके कारण उपकुलसचिव नीरजा नामदेव को नई जिम्मेदारी नहीं मिल पा रही है। कुलपति के कारण ही अब यह विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रो सुरेन्द्र सिंह को कुलपति जाने नहीं देना चाहते। कई ऐसे काम हैं जो उनके बिना कुलपति नहीं कर सकते। यही वजह है कि कुलपति को मोह प्रो सुरेन्द्र सिंह से खत्म नहंी हो रहा है। यही कुलपति और कुलसचिव की मिली भगत के खेल ने सारी व्यवस्थाएं चौपट कर दी है। अब कुलपति की कारस्तानी की शिकायत नीरजा नामदेव ने एसीएस उच्च शिक्षा विभाग से कर दी है।
वित्तीय फाइलें निपटाने का आरोप
कुलपति और कुलसचिव ने मिल कर पिछले एक सालों में कई गुल खिलाए। नए प्रोजेक्ट और कोर्स शुरू करने के नाम पर काफी कुछ कर डाले। कई वित्तीय फाइलें भी पेडिंग में थी। अब उन्हें ही तेजी से कुलसचिव के रहते निपटाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कुलसचिव के जाने के बाद नीरजा नामदेव के आने से कई फाइलों पर आपत्ति लग सकती है। यही वजह है कि कुलपति और कुलसचिव दोनों ताबड़तोड़ बैटिंग करने में लगे हुए हैं। इसी वजह से नीरजा नामदेव को चार्ज भी नहीं दिया जा रहा है।
भाजपा सरकार में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए। राजनीति से लेकर नौकरी तक में महिलाओं के लिए आरक्षण में सीटें बढ़ा दी। हर काम में महिलाओं को आगे रखा जा रहा है। महिला अधिकारियों ने पाकिस्तान से हुई लड़ाई में ही नेतृत्व किया। वहीं अवधेश प्रताप ङ्क्षसह में महिला अधिकारी का अपमान किया जा रहा है। सरकार ने नीरजा नामदेव को तो कुलसचिव पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया लेकिन कुलपति ही उन्हें प्रभार नहीं दिला रहे। वह शायद महिला अधिकारी को पद के लायक ही नहीं समझ रहे हैं। हालांकि सुरेन्द्र सिंह परिहार के विवि से जाने से कईयों को नुकसान होगा। सुरेन्द्र सिंह परिहार सरल और सहज हैं। उनके बोलचाल भी नरम हैं। उन तक सभी आसानी से पहुंच जाते थे लेकिन नई कुलसचिव नीरजा नामदेव के साथ ठीक उलटा है। उनमें अहंम है। वह लोगों से सीधे मुंह बात भी नहीं करती। काम में गारंटी की उम्मीद इनसे करना बेमानी है। महिला होने के कारण कोई भी रात में इनसे संपर्क भी नहीं कर पाएगा। इसके अलावा भी कई नुकसान विवि को उठाने पड़ेंगे।

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