विंध्यभारत, रीवा
मकर संक्रांति का त्योहार देशभर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. हिंदू धर्म में भी मकर संक्रांति का पर्व बहुत ही विशेष महत्व रखता है. जैसे ही नए साल की शुरुआत होती है लोगों को मकर संक्रांति के त्योहार का बेसब्री से इंतजार रहता है. लेकिन, इस बार लोगों में मकर संक्रांति की तारीख को लेकर बड़ा संशय बना हुआ है. कोई कह रहा है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 तो है तो कुछ लोग 15 जनवरी को संक्रांति मनाने की बात कर रहे हैं. अक्सर पर्व की इन्हीं तिथियों को लेकर किसी ना किसी कारण से लोगों में कंफ्यूजन बना रहता है।
रीवा जिले में भी मकर संक्रांति पर्व को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष 14 और 15 जनवरी को मनाए जाने वाले त्योहार के लिए प्रशासन और स्थानीय आयोजन समितियां धार्मिक स्थलों, जलप्रपातों और नदी तटों पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। शहर के प्रमुख मंदिरों से लेकर ग्रामीण अंचलों के पिकनिक स्पॉट तक मेलों की रौनक दिखने लगी है। प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
रीवा शहर के किला परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में परंपरा के अनुसार एक दिवसीय भव्य मेला लगेगा। इसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के साथ-साथ खरीदारी और पारंपरिक खानपान की दुकानें सजने लगी हैं। दुकानदारों ने अपनी जगहें चिन्हित कर ली हैं और मेला क्षेत्र में साफ-सफाई का काम तेजी से कराया जा रहा है।
क्योटी जलप्रपात में 4 दिन चलेगा मेला
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल क्योटी जलप्रपात, देवतालाब, बसामन मामा, चिन्नईधाम, लक्ष्मणबाग और कोठी कंपाउंड के मनकामेश्वर देवालय में भी मेलों और धार्मिक आयोजनों की परंपरा है। खासतौर पर क्योटी जलप्रपात में लगने वाले चार दिवसीय मेले को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। यहां सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस और प्रशासनिक अमले की तैनाती की योजना बनाई गई है। मेला शुरू होने से एक दिन पहले वरिष्ठ अधिकारी मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।
तिल-गुड़ और झूलों का आकर्षण
संक्रांति के मेलों में तिल-गुड़ से बने पकवान, दान-पुण्य और पारंपरिक खरीदारी का विशेष महत्व है। बच्चे जहां झूले, खिलौने और खेलों का आनंद लेंगे, वहीं बड़े धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन-पूजन में शामिल होंगे। संक्रांति से पहले ही जिले में उत्सव का माहौल बनना शुरू हो गया है। पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को सूर्य उत्तरायण में प्रवेश कर रहे हैं. इसका समय दोपहर 3 बजकर 13 मिनट बताया गया है और मैं यहां वही पंचांग फॉलो कर रही हूँ, जैसा कि मैं हमेशा करती हूँ. इस दिन दान का विशेष समय भी इसी अवधि में माना गया है, जो दोपहर 3:13 मिनट से शाम 5:45 मिनट तक रहेगा. हालांकि, इसमें एक छोटा सा विशेष बिंदु जोडऩा जरूरी है. 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, ऐसे में चावल का दान उसी दिन न करके अगले दिन किया जा सकता है.