विंध्यभारत, रीवा
यह पूरा मामला रीवा के रिंग रोड स्थति टोल प्लाजा के पास संचालित द चन्द्रपुरिया आरा मशीन से जुड़ा हुआ है। यहां पर गुढ़ रेंज में पदस्थ परिक्षेत्र सहायक हरिनाथ साकेत और बीटगार्ड आशुतोष पाण्डेय पहुंचे थे। उन्होंने अवैध लडक़ी डंप करने के नाम पर आरा मिल संचालक से रुपए वसूले थे। 5 हजार रुपए आरा मिल संचालक शिवम मिश्रा ने परिक्षेत्र सहायक के रिश्तेदार के खाते में भी भेजा था। रुपए देने और उनके मौके पर पहुंचने की सारी रिकार्डिंग शिवम मिश्रा ने अपने पास रख ली थी। इसके बाद शिवम मिश्रा ने शिकायत लेकर सीसीएफ के पास पहुंच गया। सीसीएफ ने जांच के लिए एसडीओ रीवा को भेजा।
रीवा वन मंडल कार्यालय से मौके पर जांच करने एसडीओ टीम के साथ पहुंचे। मौके पर लकड़ी पाई गई। इस पर शिवम मिश्रा ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारी ही लडक़ी गिरवा कर गए हैं। इसके बदले राशि की वसूली भी की। वहीं वनकर्मियों ने आरोपों का खंडन किया। जबरन फंसाने का आरोप लगाया। मामला उलझता देख सही बात का पता लगाने सीसीएफ ने सीधी और मैहर के एसडीओ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। दोनों अधिकारियों की जांच में सच सामने आया।
बताया गया है कि सीधी और मैहर एसडीओ ने मामले की जांच की। जांच में दोनों ही वनकर्मी टॉल संचालक के जाल में फंस गए। शिकायत सही पाई गई। रुपए वसूलने के रिकार्ड और सीसीटीवी भी दिखाए गए। इसके कारण वनकर्मियों का पक्ष कमजोर पड़ गया। जांच प्रतिवेदन दोनों अधिकारियों ने सीसीएफ राजेश राय के पास प्रस्तुत किया। इसके आधार पर ही सीसीएफ ने डीएफओ को कार्रवाई के लिए निर्देश किया। डीएफओ ने वनपरिक्षेत्र सहायक हरिनाथ साकेत और बीटगार्ड आशुतोष पाण्डेय को निलंबित कर दिया है। उल्लेखनीय है कि रीवा में कई टॉल और आरा मिल संचालित हैं। इन सभी को वन विभाग का संरक्षण मिला हुआ है। हाल ही में तेजी से अवैध लकडिय़ों के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई हुई। फिर बंद कर दी गई। इसके पीछे वजह मिल संचालकों और टॉल संचालकों को परेशान करना था। जैसे ही आरा मिल संचालक प्रभावित हुए और रुपए देना शुरू किए। अवैध लकडिय़ों के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दी गई। इसी का नतीजा अब सामने आने लगा है।
इनका कहना है…
दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शिकायत आई थी। दोनों को निलंबित कर दिया गया है।
लोकेश निरापुरे
डीएफओ, रीवा वन मंडल