बंगाल का भद्रलोक

शिवेंद्र तिवारी-9179259806


बंगाल 2026: बंगाल की सत्ता को भद्रलोक नियंत्रित करती रही है. भद्रलोक में कौन, यह आप जानना चाहते होंगे. जैसे बिहार में ऊंची जातियों के समूह को सवर्ण जमात कहते हैं, वैसे ही बंगाल में ब्राह्मण, कायस्थ और बैद्य को भद्रलोक कहा जाता है.

भद्रलोक की सामाजिक पहचान में शिक्षा और साहित्य है. ये शारीरिक श्रम (मजदूरी/खेती) वाला काम कम, व्हाइट कॉलर जॉब अधिक करते हैं. रवींद्र संगीत, सिनेमा, बौद्धिक चर्चा वाले अड्डे इनसे पहचान पाते हैं.

भद्रलोक पहले कांग्रेस, फिर माकपा, वर्तमान में तृणमूल के साथ रहा है. BJP के शीर्ष को पता है, बिना भद्रलोक के सरकार में नहीं आ सकते. बंगाल प्रभारी के रुप में बिहार के मंत्री मंगल पांडेय लगातार इस कारण भी बने हैं. बंगाल चुनाव के ठीक पहले नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाना भी रणनीति है. वे बंगाल चुनाव के एलान तक पूर्ण अध्यक्ष भी बन जाएंगे.

भद्रलोक की ताकत देखिए, ममता बनर्जी की जाति ब्राह्मण है. पहले भी कई ब्राह्मण CM बने. लोग कायस्थों की संख्या की बात करेंगे. संख्या चाहे जितनी हो, बुद्धि से ये आगे निकलते हैं. लंबे समय तक मुख्य मंत्री रहे ज्योति बसु भी कायस्थ थे. बंगाल में और भी कायस्थ मुख्य मंत्री बने हैं. कायस्थ इतिहास में बंगाल नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चित्तरंजन दास, बिपिन चंद्र पॉल का नाम भी शान से लेगा.

अभी ममता बनर्जी के पास कायस्थ चेहरों में सांसद सौगात रॉय, चर्चित नेता मदन मित्रा, पूर्व वित्त मंत्री अमित मित्रा जैसों की कतार है, BJP भद्रलोक के मुकाबले को TMC से बराबरी पर लाने की कोशिश कर रही है. अमित शाह ने माइक्रो मैनेजमेंट में सब कुछ शामिल कर रखा है. लेकिन, बंगाल में लड़ाई ममता बनर्जी से है और ये कठिन भी है.

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