शिवेंद्र तिवारी
आज रीवा का आसमान सिर्फ नीला नहीं था… उसमें एक सपना उड़ रहा था — वह सपना जो पीढ़ियों से विंध्य की आंखों में पलता आया था। जब ATR-72 विमान ने रीवा की धरती को छुआ, तो सिर्फ इंजन की आवाज़ नहीं गूंजी — गूंजे वो अरमान, जो बरसों से कहते आए थे, “कब रीवा से उड़ान भरेगी हमारी धरती?”
आज वह घड़ी आ गई, जब हर रीवावासी की आंखों में चमक थी, हर दिल में गर्व था। यह सिर्फ एक विमान की लैंडिंग नहीं, यह रीवा के सपनों की टेकऑफ थी — और इस सपने को हकीकत में बदलने का श्रेय निस्संदेह उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल को जाता है।
उन्होंने जिस दृढ़ता और लगन से रीवा एयरपोर्ट के विकास को आगे बढ़ाया, वह उनकी दूरदर्शी सोच और क्षेत्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रमाण है। उनके नेतृत्व में विंध्य की आवाज़ पहली बार सरकार के उच्च गलियारों तक पहुंची — और आज उसी का परिणाम है कि रीवा का नाम देश के हवाई नक्शे पर दर्ज हो गया।
और इस ऐतिहासिक क्षण को और भी खास बना दिया कैप्टन राघव मिश्र ने — विंध्य के उस सपूत ने, जिसने अपने ही शहर की धरती पर विमान उतारकर भावनाओं को उड़ान दे दी। जब वह ATR-72 को लेकर रीवा एयरपोर्ट पर उतरे, तो मानो एक बेटा अपनी मातृभूमि के आंचल को प्रणाम करने आया हो।
आज रीवा एयरपोर्ट पर उतरा यह विमान केवल यात्रियों को नहीं, बल्कि उम्मीदों और संभावनाओं को लेकर आया है। यह संदेश दे गया कि अगर नेतृत्व ईमानदार हो और जज़्बा सच्चा, तो कोई सपना दूर नहीं।
यह पल सिर्फ रीवा का नहीं, पूरे विंध्य का है। वह विंध्य जो दशकों से विकास की प्रतीक्षा में था, आज नई उड़ान भर रहा है।
राजेन्द्र शुक्ल की सोच, कैप्टन राघव की उड़ान और रीवा की मिट्टी का जज़्बा — इन तीनों ने मिलकर इतिहास रच दिया।
“रीवा ने आज साबित किया — जब हौसला और संकल्प साथ हो, तो आसमान भी झुक जाता है।”