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नगरीय प्रशासन के आदेश को जिला प्रशासन नहीं दे रहा तबज्जो, घनी बस्तियों के बीच संचालित हो रही आरा मशीनों में आग से निपटने की नहीं है व्यवस्था

आंख बंद कर वन परिक्षेत्र अधिकारी आरा मशीनों के लाईसेन्स को हर वर्ष कर रहे हैं रिनू
शहर के ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों और होटलों में भी आग से निपटने की माकूल व्यवस्था नहीं

देवेन्द्र दुबे, रीवा

शहर में सरकारी कार्यालय हो या फिर निजी दुकानें और बड़े-बड़े शोरुम हो ज्यादातर जगहों पर अग्नि हादसों से निपटने के लिए माकूल इंतजाम नहीं हैं। शहर के शायद ही किसी भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम लगा हो। ऐसे में अगर ऊंची इमारतों में आग लगी तो अग्नि हादसे से निपटना मुश्किल हो जाएगा।
अग्नि हादसों से निपटने के लिए जहां निजी भवनों में कोई सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम नही हैं वहीं सरकारी कार्यालयों मैं भी फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं लगाए गए हैं। दो अथवा तीनमंजिला भवन में सभी प्रमुख विभागों के कार्यालय हैं, जहां पर अधिकारियों, कर्मचारियों से लेकर पब्लिक का आना-जाना दिनभर लगा रहता है लेकिन अग्निहादसों से निपटने के लिए किसी तरह से इंतजाम नहीं हैं। रिकार्ड रुम, नजारत शाखा आदि जगहों पर आग बुझाने के लिए फायर सिलेंडर लगाए गए हैं लेकिन वह भी शोपीस हो चुके हैं। अगर किसी कारण बस आग लगी तो नियंत्रण पाना बड़ा मुश्किल हो जाएगा। इतना ही नहीं जिले में शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक संचालित आरा मशीनों में भी आग से निपटने के लिए कोई व्यवस्था देखने को नहीं मिलती है। जबकि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सिर्फ रीवा जिला प्रशासन को ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि फायर प्लान नियमों को न मानने वालों पर सख्त कार्यवाही की जाय।
घनी आबादी में संचालित है आरा मशीन
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक घनी आबादी के बीच में आरा मशीन वर्कशॉप संचालित हो रहे हैं। इन आरा मशीनों के परिसर में सूखी लकडिय़ों का भण्डार होता है साथ ही जब लकडिय़ों की चिराई की जाती है तो आरा मशीन के ब्लेड और लकडियों के बीच घर्षण पैदा होने के कारण काफी चिंगारियां उठती देखी जाती हैं। इसके बावजूद भी जिले के अगर एकात आरा मशीनों को छोड़ दिया जाय तो ९५ फीसदी से ज्यादा आरा मशीनों में आग से निपटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। गौरतलब है कि बहुत सारी ऐसी आरा मशीनें हैं जो संचालन के समय वहां किसी भी प्रकार के घर और बस्तियां नहीं थी इसी शर्त पर आरा मशीनों को लाईसेन्स भी प्रदा किया गया था लेकिन इन दिनों शहर में संचालित चाहे बिछिया मोहल्ले की आरा मशीन हो या फिर कस्बाई क्षेत्रों में चल रही आरा मशीनों के आस-पास काफी घनी बस्ती हो गई हैं अगर आरा मशीनों संचालकों के लापरवाही के चलते किसी प्रकार की आगजनी की घटना घटित होती है तो आरा मशीनों के आस-पास बसी बस्तियों का बचना मुश्किल हो जायेगा। ऐसा भी नहीं है कि जंगल विभाग इन कमियों से वाकिफ नहीं है संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के रिपोर्ट के ही आधार पर प्रतिवर्ष आरा मशीनों के लाईसेन्सों को रिनू किया जाता है। अब सवाल यह पैदा होता है कि इन सारी कमियों के बावजूद भी आरा मशीनों का लाईसेन्स कैसे रिनू हो जाता है।
कई बसाहटों में फायर वाहन तक नहीं पहुंचेगा
शहर की बसाहट की बात की जाए तो कई जगहों पर लोगों द्वारा सडक़ पर अतिक्रमण कर मकान व दुकान बना लिए गए हैं। जिन जगहों पर अतिक्रमण किया गया है, वहां पर अगर किसी दिन कोई अग्निहादसा होता है तो आग बुझाने के लिए दमकल वाहन तक के जाने की जगह नहीं है। शहर के आजाद नगर सहित कई कॉलोनियां हैं, जहां पर इतनी संकरी सडक़े हैं कि फायर वाहन उन सडक़ों पर नहीं जा सकता है। शहर का विस्तार हो रहा है लेकिन बेतरतीब तरीके से बसाहट होने से सुरक्षा संबंधी मामलों को दरकिनार किया जा रहा है।
सेफ्टी ऑडिट होना जरुरी
शहर में स्थित सरकारी कार्यालय भवन, निजी शोरुम, प्रतिष्ठान, निजी व सरकारी विद्यालयों में सेफ्टी आडिट समय-समय पर करानी चाहिए लेकिन नगर निगम द्वारा आज तक ऊंची इमारतों और सरकारी भवनों की सेफ्टी ऑडिट नहीं की गई है। गौरतलब है कि भीषण गर्मी के चलते कहीं पर शार्ट शर्किट से आग लगने की सूचनाएं मिलती हैं। समय रहते अगर निजी और सरकारी भवनों की सेफ्टी ऑडिट नहीं कराई गई तो किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
इमारतें ऊंची पर सीढिय़ां संकरी
शहर में जितनी भी चार मंजिला इमारतें बनी हैं, ज्यादातर इमारतों में फायर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। इसके साथ ही इमारतों में ऊपर जाने के लिए जो सीढिय़ां बनाई गई हैं, वह इतनी संकरी है कि एक साथ दो लोगों का निकलना मुश्किल है। सही तरीके से भवनों की जांच कराई जाए तो असलियत सामने आ जाएगी। सवाल ये भी उठ रहे हैं, ऊंची इमारतों में संकरी सीढिया बनाने की अनुमति नगर निगम द्वारा क्यों दी गई? इमारत का जब नक्शा पास किया गया था, उस समय से संबंधित मानकों का पालन क्यों नहीं कराया गया था?
फायर प्लान जमा नहीं करने वालों से 2.86 लाख रुपए वसूले जाएंगे
बढ़ती आग की घटना के बाद भी फायर सेफ्टी प्रमाण-पत्र नहीं होने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त ने प्रदेश के सभी कलेक्टर, आयुक्त ननि को आदेश दिए हैं कि समय सीमा में फायर प्लान समिट नहीं करने वालों पर एक साल तक प्रतिदिन 500 रुपए का अर्थदंड लगाया जाए।
एक साल बाद पर 1000 रुपए से अर्थदंड लिया जाए। कुल मिलाकर 16 फरवरी 2023 से 29 मई 2024 तक फायर प्लान समिट नहीं करने वाले भवन मालिक और संचालकों से 2,86,500 रुपए की राशि वसूल की जाए। आयुक्त ने इसके लिए 7 दिन का वक्त देकर कार्रवाई से अवगत कराने के लिए भी कहा था।
ऐसे की जाएगी वसूली
मुख्यालय भोपाल से आए आदेश के मुताबिक 16 फरवरी 2023 से अर्थदंड लगाने की प्रक्रिया बताई गई है। इसके तहत 16 फरवरी 2023 से 15 फरवरी 2024 तक फायर प्लान समिट नहीं करने वालों पर 500 रुपए रोज के हिसाब से उक्त अवधि तक 182500 रुपए का अर्थदंड लगाया जाएगा। इसके साथ ही 29 मई 2024 की स्थिति में एक साल निकलने पर 104 दिन का 1000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त राशि 104000 रुपए ली जाएगी। इस तरह दोनों राशियों को मिलाकर कुल 286500 रुपए अर्थदंड फायर प्लान समिट नहीं करने वालों से वसूल किए जाएंगे।
होटल और रेस्टोरेंट में भी उचित व्यवस्था नहीं
बढती अगलगी की घटनाओं के बीच बिजली कंपनी के साथ लोग भी कम लापरवाह नहीं हैं। खासकर शहरी इलाके में बड़ी-बड़ी इमारतों समेत कई होटलों और रेस्टोरेंटों में फायर सेफ्टी का एनओसी नहीं लेना और हर साल उसका ऑडिट कराने वालों की संख्या काफी कम है। शहर के कुछ बड़े होटलों में फायर सेफ्टी यंत्र लगाने के साथ एनओसी भी लिया जाता है। लेकिन, अधिकतर भीड़-भाड़ वाले होटलों और रेस्टोरेंट में अगला फायर सेफ्टी मानक के अनुसार नहीं हैं। शहर में सैकड़ों की संख्या में बड़े निजी इमारत और सरकारी दफ्तर के साथ शहर की हर गलियों में चलाये जा रहे निजी क्लिनीक के अलावा कई बड़े मॉल, प्रतिष्ठान होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में फायर सेफ्टी का एनओसी नहीं हैं। फायर स्टेशन के अनुसार शहर के कुछ ही मॉल और क्लीनिक वाले ऑडिट कराते हैं, जबकि ज्यादातर के पास एनओसी हैं। ऐसे में अगलगी की घटना होने पर उनके पास आग का कोई प्रबंध नहीं होता है।
इनका कहना है
रिस्क पास्बिल है निकट भविष्य में आरा मशीनों में आग से निपटने संबंधी व्यवस्था के लिए आरा मशीन संचालकों को हिदायत दी जायेगी।
अनुपम शर्मा,
डीएफओ रीवा

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